शनिवार, 5 नवंबर 2016

28-02-2001

राष्ट्रीय सहारा

समस्याएं महिलाओं की
लीना मेहेंदले

मैं तीन शादी- शुदा लड़कियों की मां हूं, दो वर्ष पूर्व मेरे पति ी मृत्यु हो गयी। मेरे पास गांव की कुछ जमीन के सिवा कुछ नहीं है।तीन में से केवल एक बेटी प्राइवेट स्कूल प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती है। बेटियों की शादी में मैने अच्छा दहेज भी दिया था। अब मैं गुजारे के लिये किसके आगे हाथ फैलाऊं? क्या मेरे दामाद मुझे मदद करने के लिए कानूनन जिम्मेदार हैं?
मालती देवी, गाजीपुर

भारतीय दंड संहिता की धारा मी आर पी.सी. १२५ के अनुसार मां बाप अपनी शादी शुदा बेटियों से भी गुजारा भत्ता मांग सकते है।गुजारा भत्ता कितना मिल पायेगा यह स्थिति पर निर्भर करेगा। आप अपनी उस बेटी से गुजारा भत्ता मांग सकती हैं जो प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती है। जो बेटियां नहीं कमा रहीं आप उनसे गुजारा भत्ता नही मांग सकती। आपको यह भी स्पष्ट करना पडेगा कि जमीन से कितनी कमाई होती है और उस कमाई से क्या वाकई गुजारा नहीं चल पा रहा है? इसका मतलब यह भी निकलता है कि मां-बाप को चाहिए कि लड़की को इस काबिल बनाये या बनने में प्रोत्साहित करें ताकि वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके।

मैं २४ वर्षीय नौकरी शुदा युवती हूं, मेरे मां-बाप मेरी मर्जी के खिलाफ मेरी शादी तय कर दी है। मैं अभी कुछ समय अपने कैरियर के प्रति गंभीर रहना चाही हूं तथा अपनी मर्जी से शादी के पक्ष में हूं। क्या मुझे यह अधिकार प्राप्त है? तो कैसे?
-नासिरा अली, लखनऊ
२४ वर्ष की लड़की बालिग होती है इसलिए उसकी मर्जी के बिना उसके मां बाप उसकी शादी नही कर सकते। नासिरा जी आपको कानूनन यह अधिकार है कि आप शादी के लिए मना कर सकती हैं।अधिकार कैसे मिले? का जवाब यह है कि पहले तो आप अपने मा बाप को समझाएं और इसके बाद भी वह न मानें तो आप पुलिस से संरक्षण प्राप्त कर सकती है।अलग हटकर अपने मां-बाप को नोटिस दे सकती हैं या फिर राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत कर सकती हैं। जिसके आधार पर आयोग मां-बाप को सम्मन भेज कर उन्हे शादी न करने के लिए निर्देश भेज सकता है। और नसिरा जी आपको यह लगता है कि मां-बाप के साथ घर में नहीं रह सकती को वर्किंग वूमन होस्टल में रहकर भी आप अपना कैरियर संभाल सकती हैं।

मेरी शादी १७ साल की उम्र में कर दी गयी थी। ससुराल वालों के अत्याचारों से ऊबरकर मैं मायके आ गयी। अब मैं २६ साल की हूं। मायके वाले मेरे भविष्य के प्रति चिंतित नहीं दिखते। मैं ज्यादा पढ़ी -लिखी भी नहीं हूं। क्या करूं?
-इंदु मखीजा, चंडीगढ़
पढ़ी लिखी न होने के बाद भी आप दुकान या छोटी-मोटी नौकरी या व्यवसाय करके अपनी आय का कुछ साधन बनायें यही उचित रहेगा। इंदु जी ससुराल वालों से भी गुजारा भत्ता मांगा जा सकता है और यदि शादी में दहेज दिया है तो वह भी वापस लिया जा सकता है।ससुराल वालो से यह भी पूछा जा सकता है कि यदि वह इंदु को वापस नहीं ले जा रहे है तो उसे तलाक क्यों नही दे रहे? तलाक इसलिए भी आवश्यक है कि चाहते हुए भी आप बिना तलाक के दूसरी शादी नहीं कर सकती इसलिए सबसे पहले तलाक की कार्यवाही शुरु होनी चाहिए। कानून के मुताबिक लडकी सिर्फ पति से ही गुजारा भत्ता मांग सकती है, मां-बाप या भाई से नहीं।आप आर्थिक स्वतंत्रता के लिए अवश्य ही कोई कदम उठायें।

मेरे पति पहले तो कभी-कभी शराब पीथे थे, लेकिन इधर एक साल से वह रोजाना रात में शराब पीकर घर लौटते हैं। इसीलिए हमारा दांपत्य जीवन व परिवार बिखर रहा है, रोज झगड़े होते हैं। समझाने पर वो समझते नहीं?
-रूपा गांगुली, कलकत्ता
आपकी ऐसी समस्या है जिसका आपकी परिस्थितियों में कोई तुरंत या रामवाणनुस्खा गयी है। अधिकांश पुरुष इसके शिकार हैं। रूपा जी आप अकेली अपने पति की आदत को नहीं सुधार सकती इसके लिए आपके मायके और ससुराल वाले सामूहिक रूप से अलग-अलग आपके पति को समझाएं तब वह शराब की आदत को छोड़ पाएंगे इसके लिए उन्हें आप सब लोगों की सहानुभूति भी चाहिए होगी। रूपा जी कई बड़े शहरों में ऐसा नियम है कि जिस महिला का पति शराबी है या उसको ऐसी ही कोई बुरी आदत लगी हुई है तो वह अपने पति के कार्यालय में निवेदन कर सकती है जिसके अन्तर्गत पति का सारा वेतन हर माह उस महिला को दे दिया जाता है ताकि वह अपना और अपने बच्चों का भरण-पोषण कर सके। वैसे एक सलाह यह भी है कि आप कुछ नौकरी वगैरह करके आर्थिक रूप से निर्भर बनने की कोशिश करें।
नोट: लीना मेहेंदले के यह व्यक्तिगत विचार और सुझाव हैं।
प्रस्तुति: चांद खां रहमानी



नवी दिल्ली, बुधवार, ७ मार्च, २००१

सहारा सलाह
समस्याएं महिलाओं की
-लीना मेहेंदले

मैं २४ वर्षीय विवाहिता हूं। एक साल पहले ही मेरी शादी हुई है, लेकिन एक महिने बाद ही मुझे इस बात का अहसास हुआ कि मेरे पति की मित्रता एक दूसरे पुरुष से है। उसके साथ उनके संबंध भी हैं। कुछ समय तक तो मैने सब कुछ बर्दाश्त किया, लेकिन अब मैं यह सब नहीं सह सकती। इस बारे मे मैं किसी से बात भी नहीं कर सकती। मैं क्या कर सकती हूं, कृपया मेरा मार्गनिर्देशन करें।
आरती पंत, दिल्ली
सबसे पहले तो आपको अपनी मनोदशा संभालनी होगी और अपने परिवार के कुछेक सदस्यों को, चाहे वे ससुराल वाले हों, मायके वाले या आपकी सहेलियों मे से हो, अपना राज बताना पड़ेगा। फिर उनकी मदद से पति को समझा-बुझाकर किसी
मनोवैज्ञानिक के पास इलाज के लिए ले जाना पड़ेगा। यदि आपके पति एक ही झटके में अपने संबंध नहीं तोड़ सकते तो उन्हें इसे धीरे-धीरे कम करने के लिए समझाया जा सकता है।महत्वपूर्ण जानकारी आपने नही दी है कि यौन संबंधों के अलावा अन्य बातों मे पति आपके साथ कैसा व्यवहार करते हैं। इस पर भी काफी कुछ निर्भर करता है।

मेरे पति से मेरा तलाक हुए एक साल हो गये, लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद उन्होंने हमारे दो साल के बेटे को मुझे नहीं सौंपा। जब मैं उनसे बेटे को सौंपने के बारे में कहती हूं, वह तरह-तरह की धमकियां देते हैं। मैं डरकर उनकी शिकायत भी नहीं कर पाती।
राजेश्वरी, गुरुगांव
आप पति के विरुद्ध अदालत की अवमानना का दावा कर सकती हैं और निर्देश पालन न करने का दावा भी कर सकती हैं। उनके धमकाने परआपको डरने की जरुरत नहीं है। धमकियों के विरुद्ध आप पुलिस में भी शिकायत कर सकती हैं। इस पूरे केस का ब्यौरा देते हुए आप हरियाणा
दर्ज कर सकती हैं।

३ मैं जमशेदपुर की रहने वाली हूं।अपने पांच साल के विवाहित जीवन में अपने पति के कहने पर मुझे चार बार अपना गर्भपात कराना पड़ा है और वह भी, इसलिए क्योंकि हर बारभ्रूण परीक्षण के बाद यह मालूम चला कि मेरे गर्भ में मादा शिशु है। अबकी बार मैं फिर गर्भवती हूं, लेकिन मैं इस बार वह सब नहीं करना चाहती, जो पहले हुआ। चूंकि मेरे माता-पिता, दोनों ही जिन्दा नहीं है और न ही मेरे कोई भाई-बहन है, इसीलिए मैं ससुराल छोड़ भी नहीं सकती। कपया बतायें, मैं क्या करूं?
जेनी इब्राहिम, जमशेदपुर
बार-बार गर्भपात कराना आपके अपने लिए भी अत्यंत बड़ा खतरा है और लिंग परीक्षा के बाद लडकी का गर्भ गिराना एक अपराध भी है। बार-बार गर्भपाति करवाने से आपको कैन्सर या अन्य इन्फेक्शन हो सकता है और जान का खतरा भीहो सकता है। अब भी आप गर्भवती हैं तो सबसे अच्छा यह होगा कि लिंग परीक्षा न करवाएं। इस अपराध में सबसे पहले आपको अर्थात मां को सजा होती है। डॉक्टर, आपके पति या ससुराल वालों को भी सजा हो सकती है। आप पुलिस में लिखित रूप में शिकायत कर सकती हैं कि उन्होंने जबरदस्ती आपका गर्भपात करवाया। लेकिन सबसे अच्छा होगा यदि आप किसी स्वयंसेवी संस्था से इस विषय में बात करें। डाक्टर भी यदि खुद अच्छा है और पैसे का लालची नही है तो वह भी आपके पति को समझा सकता है।

४ मैं ५५ वर्षीय वृद्धा हूं। मेरे पति को गुजरे दो साल हो गये हैं और अब मैं अपने बेटे के साथ रहती हूं, लेकिन मेरी बहू का व्यवहार मुझसे अच्छा नहीं।कई बार सोचती हूं कि घर छोड़कर किसी वृद्धाश्रम चली जाऊं। फिर यह भी लगता है कि जिस मकान में हम रहते हैं, वह मेरे नाम है। मैं किससे मदद मांगू, कृपया बतायें।
शारदा शर्मा, बहराइच
अगर आपका घर आपके नाम से हैं तो आपके अधिकार की सुरक्षा के लिए यह एक अच्छी बात हैं। लड़के और बहू को आपको समझा-बुझाकर चलना
होगा। फिर आपके अपने व्यवहार पर भी बहुत कुछ निर्भर है। क्या आप कभी अपना मन भी टटोलती हैं कि गलती कहीं आपकी तो नही? यदि है तो उसे स्वीकार कर सुधारना पड़ेगा। थोड़ा-बहुत आपको अपनी बहू की पसंद, नापसंद , उमंगो और सपनों का भी खयाल रखना पड़ेगा। पास-पडोस को भी संभाल कर रखिये। अभी तो आपकी उम्र भी काम-काज करने लायक है। इसलिए आपको कोई न कोई काम अवश्य हाथ में लेना चाहिए- चाहे वह पोते-पोतियों का काम ही क्यों न हो।

५ मैं २४ वर्षीय एक अनपढ़ लड़की हूं।आपसे मदद मांगने के लिए अपनी दीदी से पत्र लिखवा रही हूं। बात यह है कि मेरे माता-पिता को मेरे कई साल हो गये हैं और मैं अपनी दीदी-जीजा के साथ रहती हूं। पहले तो सब कुछ ठीक-ठाक था, लेकिन पिछले एक साल से मेरे जीजा ने मेरे साथ दुष्कर्म करना शुरू कर दिया है। विरोध प्रकट करने पर वह मुझे और मेरी दीदी को मारते-पीटते हैं। चूंकि मेरा कोई दूसरा ठिकाना नहीं और न ही मैं पढ़ी-लिखी हूं,
इसलिए मैं घर छोड़कर कहीं जा भी नही सकती। कृपया मुझे रास्ता सुझाइए।
एक पीड़ित, गोपालगंज
सबसे पहले आप अनपढ़ेपन से बाहर निकलिये। कुछ शिक्षा पा लेने के बाद ही आपकी समस्या का कुछ समाधान हो सकता है। पहले तो दीदी को ही मास्टरनी बना कर उससे पढ़ना-लिखना सीखिये। तभी आगे कोई बात बनेगी।
प्रस्तुति: चांद खां रहमानी

देश की प्रगतिमें महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान होते हुए भी वह समाज और मर्दों की दुनिया में शोषण का शिकार है। कभी-कभी मायके वाले भी उसके दुश्मन बन जाते हैं। हालांकि आज की आधुनिक नारी कुछ हद तक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हुई है, इसके पश्चात भी उसकी समस्याएं कम नही हुई। महिलाओं की चिंताएं, समस्याएं और सवालों को हम अखबार के माध्यम से हल करना चाहते हैं। महिलाओं द्वारा भेजे गये सवालों का जवाब देंगी जानी-मानी महिला समस्याओं की विशेषज्ञ व राष्ट्रीय महला आयोग की संयुक्त सचिव लीना महेंदले। हमें महिलाओं के पत्रों की प्रतिक्षा रहेगी।

सहारा सलाह
समस्याएं महिलाओं की
रिस्पॉन्स सेल,
राष्ट्रीय सहारा, सी-,,, सेक्टर-११, नोएडा (.प्र) २०१३०१
फोन- 91-4553905, 4540610 फैक्स-91-4550750, 744
-मेल- rsahara@del2.vsnl.net.in

नयी दिल्ली, बुधवार १४ मार्च, २००१
सहारा सलाह
समस्याएं महिलाओं की
-लीना मेहेंदले

. मेरी शादी के बारह वर्ष हो गये, लेकिन मेरे संबंध कभी पति-पत्नी की तरह नहीं रहे।फलतः हमारी कोई संतान भी नहीं है, इसका कारण यह है कि मेरे पति की शादी उनकी इच्छा के विरुद्ध हुई थी। हम एक ही छत के नीचे रहते हुए भी अजनबी की तरह रह रहे हैं। जबकि हमारे ससुराल वाले चाहते हैं कि हमारा दाम्पत्य जीवन सुखद हो। लेकिन इधर दो वर्षों से मेरे पति का संबंध दूसरी लड़की से हो गया है। वे उनसे शादी करना चाहते हैं। मुझे कानूनन क्या अधिकार मिलेगा, हमें जानकारी दें।
रूपा महता, कंकड़बाग, पटना
शादी के बारह वर्ष तक आप मानसिक यातनाएं झेलती रहीं। आप के प्रश्न से साफ जाहिर है कि इतने वर्षों तक आप किसी निर्णय पर नही पहुंच सकी कि आपको क्या करना चाहिए। कानूनन आपको तलाक देने के
लिएकाई बाध्य नहीं कर सकता और पत्नी का भी हक नही बन सकता। चूंकि पति की अनिच्छा से संबंध टला है, अतः कानूनन आपका पत्नी बने रहने का अधिकार सुरक्षित है।व्यावहारिक उलझंन के लिए आपको कोई दूसरा उपाय खोजना पड़ेगा। मसलन किसी अच्छे काम की ओर प्रवृत होने से है। वैसे ससुराल वालों से मिलकर आप पति को समझाने का भी प्रयास कर सकती है। आप जैसी दूसरी बहनों के लिए यही कहूंगी कि वे समस्या का हल खोजने में इतनी देर न करें।

२ मेरी उम्र २० साल है। तीस वर्षीय मेरा पड़ोसी पिछले पांच सालों से मेरा शारीरिक शोषण कर रहा है। शुरु में हमारे संबंध स्वेच्छा से हुए थे। उसने न जाने कब आपत्तिजनक स्थिति मे मेरी तस्वीर खींच ली। अब वह तस्वीर दिखा देने तथा लोगों को बता देने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रहा है। अब मेरी शादी दूसरी जगह होने वाली है। मैं इससे कैसे छुटकारा पा सकती हूं।
रीना, सहगल मेरठ
ब्लैकमेल करना एक अपराध है इस में कडी सजा मिल सकती है।अतः आप पुलिस की सहासता से ब्लैकमेलर को पकडवाने का प्रयास कर सकती है।

मैं २० वर्षीय मेरठ संरक्षण गृह की संवासिनी हूं। मैं १२ वीं की छात्रा हूं। यहां पुनर्वास के नाम पर सिर्फ संवासिनियों की शादी करवायी जाती है। लेकिन मैं शादी करना नहीं चाहती। मैं अपने पैरों पर खड़ा होकर कुछ करना चाहती हूं। यहा नौकरी नहीं दिलायी जाती। नतीजतन यहां से निकलने का दूसरा रास्ता नहीं है। मैं स्वेच्छा से जीवन बरस भी नही कर सकती। संरक्षण गृह से बाहर निकलने तथा नौकरी दिलाने में आप क्या सहायता कर सकती हैं, मुझे जानकारी दें।
अंजू, मेरठ संरक्षण गृह
आप बालिग हैं, आपके इच्छा के विरुद्ध न तो कोई आपको संरक्षणगृह में रख सकता है और न ही शादी करवा सकता है।आपकी शिक्षा कहां तक हुई है? परिवार में प्रारंभिक सहायता कौन-कौन दे सकता है, यह सब जाने बगैर आपकी अन्य समस्याओं का उत्तर नही दिया जा सकता।

मैं १७ वर्षीय १२ वीं की छात्रा हूं। मैं अपने मौसेरे भाई से प्रेम करती हूं। वह भी मुझसे शादी करना चाहता है। उसकी उम्र २२ वर्ष है। क्या हम दोनों शादी कर सकते हैं। कानूनी अड़चने तो नही आयेंगी। कृपया सलाह दें।
रचना वर्णवाल, गाजियाबाद
आपकी उम्र १७ साल है अर्थात् कानूनन अभी आपको न शादी की अनुमति है और न शारीरिक संबंध बनाने की। अच्छा होगा यदि आप एक साल और पंढ़ाई में मन लगायें। १८ वर्ष की आयु पूरी होने पर आपको शादी की अनुमति मिलेगी। वैसे यदि दोनों परिवार हिन्दू विधान से शादी करवाते हैं तो उसे कानूनन मान्यता है।

मैं ४० वर्षीय महिला हूं। मेरी शादी हुए लगभग २० वर्ष हो गये हैं। १० वर्ष से मैं अपने पति से अलग रह रही हूं। क्या मैं दूसरा विवाह कर सकती हूं।
कल्पना शर्मा, लक्ष्मीनगर, दिल्ली
कल्पना जी, आपने यह नहीं बताया कि आपका अपने पति से तलाक हुआ है या नही। यदि तलाक नहीं हुआ है, तो कानूनन आप तब तक शादी नहीं कर सकती जब तक कि आपका विधिवत तलाक नहीं हो जाता। यदि आप दूसरा विवाह कर भी लेती है तो उसे कानूनन मान्य नही समझा जायेगा। यह जरूरी है कि शादी करने के पूर्व अपने पहले पति से तलाक ले ले।

मैं ६० वर्षीय अनाथ महिला हूं। मेरे पास आय का कोई साधन उपलब्ध नहीं है। परिवार में ऐसा कोई शुभचिन्तंक नहीं जो मेरी देखभाल कर सके। मैं ऐसी जगह जाना चाहती हूं जहां मुझे दो वक्त की रोटी और मेरी देखभाल हो सके।
पार्वती देवी, भिवानी, हरियाणा
समाज कल्याण विभाग व कुछ स्वयंसेवी संगठनों संस्थाओं द्वारा देश के सभीराज्यों में कई वृद्धाश्रम चलाये जा रहे हैं। आपको वहां भर पेट भोजन और देखभाल की सुविधा मिल सकेगी।इसके लिये आप अपने राज्य के समाज कल्याण विभाग से सम्पर्क करें।
नोट: लीना मेहेंदले के यह व्यक्तिगत विचार और सुझाव हैं।
प्रस्तुति: अनिता कर्ण

देश की प्रगति में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान होते हुए भी वह समाज और मर्दों की दुनिया में शोषण का शिकार है। कभी मर्द उसे छोड़ देता है तो कभी वह ससुराल की तरफ से पीड़ित है। कभी-कभी मायके वाले भी उसके दुश्मन बन जाते हैं। हालांकि आज की आधुनिक नारी कुछ हद तक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हुई है, इसके पश्चात भी उसके समस्याएं कम नहीं हुई। महिलाओं की चिंताएं समस्याएं और सवालों को हम अखबार के माध्यम से हल करना चाहते है। महिलाओं द्वारा भेजे गये सवालों का जवाब देंगी जानी-मानी महिला समस्याओं की विशेषज्ञ व राष्ट्रीय महिला आयोग की संयुक्त सचिव लीना महेंदले। हमें महिलाओं के पत्रों की प्रतीक्षा रहेगी।



11-3-2001

सहारा सलाह
समस्याएं महिलाओं की
-लीना मेहेंदले

. महिलाओं से संबंधित कार्य करने वाली सामाजिक संस्थाओं को सरकार से आर्थिक सहायोग कैसे मिल सकता है?
सरकार के कई कार्यक्रम स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से चलाये जाते हैं, जिसके लिए उन्हे आर्थिक सहयोग दिया जाता है। राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा पारिवारिक महिला लोक अदालत या कानूनी जागरूकता या जनसुनवाई के कार्यक्रमों के लिए साथ ही सेमिनार या रिसर्च स्टडी के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। इसी प्रकार केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड व राष्ट्रीय महिला कोष का काम भी स्वयंसेवी संस्थाओं को आर्थिक सहयोग देना है। कई अन्य कार्यक्रमों के लिए भी केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न मंत्रालय द्वारा आर्थिक सहायता
दी जाती है।

. मैं एक विधवा औरत हूं। मेरी तीन बेटियाँ हैं। दोनों के विवाह के समय उन्हें दस-दस बीघा जमीन दी थी। मेरे पास और दस बीघा जमीन है, लेकिन तीसरी बेटी की शादी पर मैं वह दहेज में नहीं देना चाहती, क्योंकि बाद में मेरे पास अपना कुछ नही रह जाएगा और मैं अपना बुढ़ाया कैसे काटूंगी?
रत्नावाली, चित्रकूट
आपका उदाहरण दूसरों को चेताने के लिए अच्छा है। बडे बेटे-बेटियों के लिए कुछ जुटाते समय लोग अक्सर छोटों का विचार नहीं करते, लेकिन आपकी छोटी बेटी अभी तो आपके ही पास है और जमीन भी। आप अपना एक मृत्युपत्र तैयार कर सकती है। उसमे यदि आप कहे कि जमीन आपके पास रहेगी और आपकी मृत्यु के उपरांत वह तीसरी बेटी को मिलेगी, लेकिन उसे ‘दहेज’ के नाम से मत पुकारिये क्योंकि दहेज देना कानूनन अपराध है। बड़ी बेटियो को दी हुई जमीन वापस मांगने के लिए यह देखना पड़ेगा कि जमीन देते समय आपने जमीन देने
का क्या कारण बताया, लिखा-पढ़ी के कागजों में क्या-क्या लिखा और क्या शर्ते रखी है। यदि ‘स्त्रीधन’ के नाम से दोनों बड़ी बेटियों को जमीन दी है तो आप उसे वापस नही मांग सकती।

. पिछले वर्ष मैने अपनी छोटी बहन की शादी की थी, लेकिन ससुराल वाले उसे कभी भी हमसे मिलने नही भेजे, न ही उसे फोन पर बात करने देते हैं। हम उसके घर जाकर मिलना चाहें तो हमें मिलने नहीं दिया जाता। उसकी कुशलता हम कैसे जानें?
प्रदीप, महिलापुर
ससुराल जाने वाली लड़की को अपने मैके में किसी से न मिलने देना या फोन पर बात तक न करने देना एक मानसिक उत्पीड़न अवश्य माना जा सकता है, इसके विरुद्ध आपकी बहन को आवाज उठानी चाहिए। लेकिन क्या आपने भी शादी के समय सारी बाते ससुराल वालों से नही की थी? क्या नही देखा था कि उनकी मानसिका कैसी है। खै़र! यदि आपको आशंका है कि बहन को मानसिक या शारीरिक रूप से उत्पीड़ित किया जा रहा है, तो आपकी आशंका का पूरा
ब्यौरा और कारण बताते हुए आप पुलिस मे या महिला आयोग में दरखास्त दे सकते है ताकि उनके माध्यम से आप अपनी बहन से एक बार मिल कर खुद सारी बातें पूछ सकें और उसके सुरक्षित होने की तसल्ली कर लें।

. हम एक वृद्ध पति-पत्नी है और अपने ही घर में रहते हैं। मेरे लड़के की शादी हुए पांच साल हो गये और वे दोनों भी हमारे पास ही रहते हैं।बहू के पिता भी बूढे हैं और उनका अपना कोई और परिवार नहीं है। बहू चाहती है कि उसके पिता भी उसके पास अर्थात् हमारे ही घर पर रहें। इस कारण हमारे घर मे मनमुटाव आरंभ हो गया है। कृपया सुझाव दें?
किशोरी मल साहू, माधवपुर
मैं तो यही कहूंगी कि आप इस प्रश्न को अपनी बहू की दृष्टि से भी देखिये। यदि उसके वृद्ध पिता के घर में उनकी देखभाल करने वाला कोई नही है, तो यह स्वाभाविक है कि आपकी बहू उनके लिए चिंतित होगी।यदि आपका कोई प्रिय मित्र वृद्ध हो और अकेला पड जाए तो आप उसे शायदअपने घर में रखना चाहेंगे और बहू से उसके इंतजाम की भी अपेक्षा रखेंगे। इस घटना को भी उसी रूप में देख सकते है। अभी तत्काल तो यह रास्ता निकल सकता है कि आपके समधी आपके घर में पेइंग गेस्ट बनकर रहे या आके घर के पास ही कोई किराये का मकान ले ले ताकि आपकी बहू उन्हे रोज मिलकर आश्वस्त हो सके। उनकी आयु और स्वास्थ्य के विचार से ही यूह सारे निर्णय लिए जा सकते हैं। यदि आप अपनी बहू के मन को समझ कर उससे सहानुभूति रखेंगे तो आपके घर के मानसिक तनाव खत्म हो जाएंगे।
नोट- लीना मेहेंदले के यह व्यक्तिगकी विचार और सुझाव हैं।
प्रस्तुति- अनिता कर्ण

देश की प्रगति मे महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान होते हुए भी वह समाज और मर्दों की दुनिया में शोषण का शिकार है। कभी मर्द उसे छोड देता है तो कभी वह ससुराल की तरफ से पीड़ित है। कभी-कभी मायके वाले भी उसके दुश्मन बन जाते हैं। हालांकि आज की आधुनिक नारी

कुछ हद तक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हुई है, इसके पश्चात भी उसकी समस्याएं कम नही हुई। महिलाओं की चिंताए समस्याएं और सवालों को हम अखबार के माध्यम से हल करना चाहते हैं। महिलाओं द्वारा भेजे गये सवालो का जवाब देगी जानी-मानी महिला समस्याओं की विशेषज्ञव राष्ट्रीय महिला आयोग की सयुक्त सचिव लीना मेहेंदले हमें महिलाओं के पत्रों की प्रतीक्षा रहेगी।
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२५ अप्रैल२००१
सहारा सलाह
समस्याएं महिलाओं की
-लीना मेहेंदले

. मेरे पति की उम्र २२ वर्ष तथा मेरी उम्र २० वर्ष है। मेरी शादी को एक वर्ष हुआ है। मेरे पति दिल्ली में नौकरी करते हैं। इसलिये वे महीने में एक दो दिनों के लिये ही घर आते हैं। घर में मैं अकेली औरत हूं। सास या ननद नहीं है सिर्फ देवर व ससुर हैं। मेरे ससुर मेरे ससुर की उम्र लगभग ४२वर्ष है। वे जवान और सुन्दर हैं। शुरू मे उनका व्यवहार मेरे साथ दोस्ताना था जिसके कारण मै उनके करीब आ गायी। अब हम दोनों के बीच संबंध बन गया हैं। कहीं यह बात मेरे पति को न पता चल जाये। मैं क्या करू बड़ी उल्झन में हूं सुझाव दें।
सुनीता, मेरठ
कानून की दृष्टि में आपके ससुर अपराधी है और आपके पति शिकायत करें तो आपके ससुर को दंड हो सकता है, लेकिन आपकी असली समस्या कुछ और है। ससुर के साथ संबंध खत्म करना ही उचित होगा। अच्छा हो कि कुछ दिनों के लिये आप मायके चली जाये बाद में पति के साथ अलग रहना शुरू करें।आप अपने देवर की शादी करने के बाद जहां तक संभव है, आपको अपने ससुर की दूसरी शादी करवा देनी चाहिये, लेकिन इसके लिये आपको अपना मन मजबूत करना पड़ेगा। यदि आप का ही मन ससुर के लिये लालायित रहेगा तो इस समस्या का अन्त नहीं है।

. मैं ३२ वर्षीय महिला हूं। मैने अपनी पसंद से शादी की थी। उस समय मेरी उम्र २२ वर्ष तथा मेरी पति की उम्र २० वर्ष थी। हमारी शादी आर्यासमाज रीति से हुई थी।मेरी शादी में मेरे तथा मेरे पति के अभिभावक नही आये थे। इस लिये दोनों ने ही इस शादी को स्वाकार नही किया। अब वर्षो बाद वे लोग (ससुराल वाले) मेरे पति को समझा-बुझाकर दूसरी शादी करना चाहते है, जबकि मेरी एक बेटी भी है। अब वे हमें का भरण-पोषण के लिये पैसा भी नहीं देते। वे इस शादी को ही अवैधानिक साबित करना चाहते हैं।
मुझे सलाह दें, मै क्या करू?
सुप्रिया त्रिपाठी, गोरखपुर
यदि आपने शादी के बाद दस वर्ष पति के साथ गुजारे हैं तो क्या वे गुमनाम रह कर बिताये थे? आपके रिश्तेदारों को पता होगा। बेटी के जन्मदिन पर, अन्य त्यौहार में या ससुराल में किसी शादी व्याह के समारोह में, कई जगह आप शामिल हुई होंगी। इन सारे प्रमाणों को मिटाना आसान नही है। बच्ची को आपने नर्सरी स्कूल में डाला होगा। वहां पिता के नाम पर आपके पति का नाम लिखा होगा। राशन कार्ड भी होगा। इसलिये आपको अपनी समस्या विस्तार से बताना होगा।आर्यासमाजी ढंग से भी जिस मंदिर में आपकी शादी हुई है, वहां उसका रिकार्ड भी होगा। आप के पास शादी का प्रमाणपत्र है या नही? आपकी समस्या से और लोगों को सबक लेना चाहिये कि शादी को अवश्य पंजीकृत कराये।

. मैं ४२ वर्षीय महिला हूं। आज से बीस वर्ष पूर्व मेरी शादी हुयी थी। सब कुछ वर्षों तक तो समान्य ढंग से चलता रहा। लगभग आठ वर्ष
पूर्व मेरे व मेरे पति के बीच वैचारिक तनाव उत्पन्न हो गया, जिसके कारण हम दोनों का अलगाव हो गया। लगभग ७ वर्षों से मैं तथा मेरी १८ वर्षीय बेटी अलग रह रहें हैं। मेरे पति मुझे तथा मेरी बेटी को भरण-पोषण तक के लिये पैसा नहीं देते। यहां तक कि छह वर्ष पूर्व उन्होंने मुझ से बिना तलाक लिये दूसरा विवाह भी कर लिया है। मुझे सलाह दें क्या करना चाहिये?
लोपामुद्रा, कानपूर
जहां तक पति के दुसरा विवाह का प्रश्न है, आप तुरंत पुलिस में उनके विरुद्ध केस दर्ज करा सकती है, जिसके उन्हें सजा हो सकती है। इसके अलावा आप गुजारा- भत्ता पाने के लिये कोर्ट में आवेदन दे सकती है और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १२५ के अंतर्गत आपको तथा आपकी लड़की को अलग-अलग- भत्ता मिल सकता है। लड़की को तब तक गुजारा मिल सकता है, जब तक उसकी शादी न हो जाती है। आपकी अपनी आय चाहे जितनी हो, फिर भी आपकी बेटी पिता से तथा आप अपने पति से गुजारा मांग सकती है।

. मैं २४ वर्षीय महिला हूं। दो वर्ष पूर्वमेरी शादी हुयी थी। मैं एक निजी संस्थान में नौकरी करती हूं। पिछले डेढ सालों से आपसी मतभेद के कारण हम अलग-अलग रह रहे है। अब स्थिति यह है कि न तो हमारे बीच सुलह हो पा रही है और न तलाक की ही स्थिती है। मुझे सलाह दें।
सरोज गोयल, मेरठ
आप दोनो के बीच सुलाह होगी या नही यह केवल आप दोनों पर ही निर्भर करता है। आप अपने रिश्तेदारों की तथा परिवार की मदद ले सकती हैं या राष्ट्रीय महिला आयोग में भी जा सकती है, जहां आपकी सुलह या आपसी सलाह से तलाक या संपत्ति का आदान-प्रदान आदि बातें तत्काल पूरी हो सकती है।

. मेरी शादी के दस वर्ष हो गये है, तब से मै संयुक्त परिवार मे रहती आ रही हूं। मेरे साथ सास, जेठानी, देवरानी व एक ननद है। मेरी सास का व्यवहार हमेशा से ही मेरे साथ खराब रहा है, लेकिन इधर देवरानी के घर में आने के बाद वे खुलेआम
अपमान व उत्पीड़ीन करने लगी हैं। पति से कहने पर वे मेरी ही गलती बता कर चुप रहने को कहते हैं। मुझे बतायें कि ऐसी परिस्थिति मे मैं क्या करूं?
रीता वर्मा, रामपुर
शादी के बाद दस वर्ष तक आप संयुक्त परिवार मे रही हैं। अब सबसे छोटी देवरानी के आने के बाद उसे सम्मान मिल रहा है और आपको उत्पीड़न तो आपको अपना व्यवहार भी कही न कही जांच परखकर देखना चाहिये।कई बार ऐसा भी हो जाता है कि बड़े परिवार का एकाघ सदस्य बद अच्छा बदनाम बुरा वाले मुहावरे की तरह आंख का काटा बन जाता है, भले ही उसकी कोई और वजह हो या न हो। यदि मनमुटाव बहु गहराई तक पैठ गया है तो इसका इलाज मुश्किल है। आप पति से सलाह कीजियें और घर वातावरण सुलझाने में आपसे जो बन सकता है कीजिये।
नोट- लीना मेहेंदले के यह व्यक्तिगत विचार और सुझाव हैं।
प्रस्तुति- अनिता कर्ण
नयी दिल्ली, बुधवार १४ मार्च, २००१
सहारा सलाह
समस्याएं महिलाओं की
-लीना मेहेंदले

. मेरी शादी के बारह वर्ष हो गये, लेकिन मेरे संबंध कभी पति-पत्नी की तरह नहीं रहे।फलतः हमारी कोई संतान भी नहीं है, इसका कारण यह है कि मेरे पति की शादी उनकी इच्छा के विरुद्ध हुई थी। हम एक ही छत के नीचे रहते हुए भी अजनबी की तरह रह रहे हैं। जबकि हमारे ससुराल वाले चाहते हैं कि हमारा दाम्पत्य जीवन सुखद हो। लेकिन इधर दो वर्षों से मेरे पति का संबंध दूसरी लड़की से हो गया है। वे उनसे शादी करना चाहते हैं। मुझे कानूनन क्या अधिकार मिलेगा, हमें जानकारी दें।
रूपा महता, कंकड़बाग, पटना
शादी के बारह वर्ष तक आप मानसिक यातनाएं झेलती रहीं। आप के प्रश्न से साफ जाहिर है कि इतने वर्षों तक आप किसी निर्णय पर नही पहुंच सकी कि आपको क्या करना चाहिए। कानूनन आपको तलाक देने के
लिएकाई बाध्य नहीं कर सकता और पत्नी का भी हक नही बन सकता। चूंकि पति की अनिच्छा से संबंध टला है, अतः कानूनन आपका पत्नी बने रहने का अधिकार सुरक्षित है।व्यावहारिक उलझंन के लिए आपको कोई दूसरा उपाय खोजना पड़ेगा। मसलन किसी अच्छे काम की ओर प्रवृत होने से है। वैसे ससुराल वालों से मिलकर आप पति को समझाने का भी प्रयास कर सकती है। आप जैसी दूसरी बहनों के लिए यही कहूंगी कि वे समस्या का हल खोजने में इतनी देर न करें।

२ मेरी उम्र २० साल है। तीस वर्षीय मेरा पड़ोसी पिछले पांच सालों से मेरा शारीरिक शोषण कर रहा है। शुरु में हमारे संबंध स्वेच्छा से हुए थे। उसने न जाने कब आपत्तिजनक स्थिति मे मेरी तस्वीर खींच ली। अब वह तस्वीर दिखा देने तथा लोगों को बता देने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रहा है। अब मेरी शादी दूसरी जगह होने वाली है। मैं इससे कैसे छुटकारा पा सकती हूं।
रीना, सहगल मेरठ
ब्लैकमेल करना एक अपराध है इस में कडी सजा मिल सकती है।अतः आप पुलिस की सहासता से ब्लैकमेलर को पकडवाने का प्रयास कर सकती है।

मैं २० वर्षीय मेरठ संरक्षण गृह की संवासिनी हूं। मैं १२ वीं की छात्रा हूं। यहां पुनर्वास के नाम पर सिर्फ संवासिनियों की शादी करवायी जाती है। लेकिन मैं शादी करना नहीं चाहती। मैं अपने पैरों पर खड़ा होकर कुछ करना चाहती हूं। यहा नौकरी नहीं दिलायी जाती। नतीजतन यहां से निकलने का दूसरा रास्ता नहीं है। मैं स्वेच्छा से जीवन बरस भी नही कर सकती। संरक्षण गृह से बाहर निकलने तथा नौकरी दिलाने में आप क्या सहायता कर सकती हैं, मुझे जानकारी दें।
अंजू, मेरठ संरक्षण गृह
आप बालिग हैं, आपके इच्छा के विरुद्ध न तो कोई आपको संरक्षणगृह में रख सकता है और न ही शादी करवा सकता है।आपकी शिक्षा कहां तक हुई है? परिवार में प्रारंभिक सहायता कौन-कौन दे सकता है, यह सब जाने बगैर आपकी अन्य समस्याओं का उत्तर नही दिया जा सकता।

मैं १७ वर्षीय १२ वीं की छात्रा हूं। मैं अपने मौसेरे भाई से प्रेम करती हूं। वह भी मुझसे शादी करना चाहता है। उसकी उम्र २२ वर्ष है। क्या हम दोनों शादी कर सकते हैं। कानूनी अड़चने तो नही आयेंगी। कृपया सलाह दें।
रचना वर्णवाल, गाजियाबाद
आपकी उम्र १७ साल है अर्थात् कानूनन अभी आपको न शादी की अनुमति है और न शारीरिक संबंध बनाने की। अच्छा होगा यदि आप एक साल और पंढ़ाई में मन लगायें। १८ वर्ष की आयु पूरी होने पर आपको शादी की अनुमति मिलेगी। वैसे यदि दोनों परिवार हिन्दू विधान से शादी करवाते हैं तो उसे कानूनन मान्यता है।

मैं ४० वर्षीय महिला हूं। मेरी शादी हुए लगभग २० वर्ष हो गये हैं। १० वर्ष से मैं अपने पति से अलग रह रही हूं। क्या मैं दूसरा विवाह कर सकती हूं।
कल्पना शर्मा, लक्ष्मीनगर, दिल्ली
कल्पना जी, आपने यह नहीं बताया कि आपका अपने पति से तलाक हुआ है या नही। यदि तलाक नहीं हुआ है, तो कानूनन आप तब तक शादी नहीं कर सकती जब तक कि आपका विधिवत तलाक नहीं हो जाता। यदि आप दूसरा विवाह कर भी लेती है तो उसे कानूनन मान्य नही समझा जायेगा। यह जरूरी है कि शादी करने के पूर्व अपने पहले पति से तलाक ले ले।

मैं ६० वर्षीय अनाथ महिला हूं। मेरे पास आय का कोई साधन उपलब्ध नहीं है। परिवार में ऐसा कोई शुभचिन्तंक नहीं जो मेरी देखभाल कर सके। मैं ऐसी जगह जाना चाहती हूं जहां मुझे दो वक्त की रोटी और मेरी देखभाल हो सके।
पार्वती देवी, भिवानी, हरियाणा
समाज कल्याण विभाग व कुछ स्वयंसेवी संगठनों संस्थाओं द्वारा देश के सभीराज्यों में कई वृद्धाश्रम चलाये जा रहे हैं। आपको वहां भर पेट भोजन और देखभाल की सुविधा मिल सकेगी।इसके लिये आप अपने राज्य के समाज कल्याण विभाग से सम्पर्क करें।
नोट: लीना मेहेंदले के यह व्यक्तिगत विचार और सुझाव हैं।


१८ मार्च २००१
सहारा सलाह
समस्याएं महिलाओं की
-लीना मेहेंदले


. मैं ११ वीं कक्षा की छात्र हूं। मेरी मां बचपन मे ही मर गयी थी, उस समय मै पांच साल की तथा मेरा छोटा भाई दो साल का था। पिता ने मेरी मां की मौत के तीन साल बाद ही दूसरी शादी कर ली थी। शुरू में मेरी नयी मां का व्यवहार हमारे साथ अच्छा रहा। बाद में उसका व्यवहार बदल गया। अब वह हम दोनो भाई बहनों के साथ दुर्व्यवहार करती है। मार-पीट, शारीरिक व मानसिक यातनायें देती है। बताये कि मुझे क्या करना चाहिये?
श्रेया खेतान, दिल्ली
तुम्हारे साथ शारीरिक शोषण कैसा होता है, यह तुम्हें साफ-साफ बताना चाहिये। बच्चों को मारपीट करना कानून की आंखो में गंभीर अपराध है और तुम पुलिस में या महिला आयोग या राज्य के मानवाधिकार अयोग में जा सकती हो, लेकिन उससे पहले तुम्हारे कोई ऐसे रिश्तेदार नहीं बचना चाहिए जो तुम्हारे पिता को समझा न चुका हो, मसलन दादा-दादी, चाचा, बुआ, नानी, मामा, मौसी आदि? तुम अपने स्कूल के प्रिंसिपल से भी बिनती कर सकती हो कि वे पिता को बुला कर समझायें। क्या तुम्हारे सौतेले भाई-बहन है? यदि हां तो तुम बड़े होने के नाते उनके साथ कैसा व्यवहार करते हो, यह भी तुम्हें देखना पड़ेगा।

. मैं एक मुसलमान लड़की हूं। मेरे पति ने दूसरी शादी कर मुझे व मेरी बच्ची को मायके भेज दिया है और कोई गुजारा नहीं देता। मेहर रकम तथा तीन महीने के गुजारे की रकम मुझे देने की पेशकाश कर चुका है, लेकिन मैने लेने से मना कर दिया था. अतः उसका कहना है कि उसे तलाकशुदा घोषित किया जाए। क्या मुझे कोई हक नहीं?
नसरीन, फरीदाबाद
मुसलमान धर्मग्रंथों के मुताबिक भी पति दूसरी शादी तभी कर सकता है, जब वह दोनों बीवियों से समान रूप से व्यवहार करे और दोनों का समान रूप से ख्याल रखे।
तलाक चाहने पर गुजारा भी केवल तीन महीने का नही बल्कि पूरी उम्र का देना पडेगा, जैसा कि हाल में मुंबई के हाईकोर्ट ने फैसला दिया है। इसके अलावा आप भारतीय दंड संहिता की धारा 125 के तहत भी गुजारा भते की मांग सकती है।

. मैं ३५ वर्षीय महिला हूं। मेरी शादी को १ वर्षहो गये। मेरी तीन बेटी है। पिछले दो वर्षो से मेरे पति व ससुराल वाले मेरे मायके वालों से दहेज की मांग, कर रहें हैं। इसके लिए वे लोग मुझे तथा मेरी बेटियों को शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न देते रहे हैं। यहां तक कि उन्होने मुझे जान से मारने की कोशिश भी की। क्या पति व ससुराल वालों पर दहेज मांगने व गुजारा भत्ते की मांग का मामला दर्ज किया जा सकता है।
शशि जैन, मेरठ
शादी के सात वर्ष बाद पति आपसे दहेज मांगना शुरू करे यह बात कुछ समझ में नयी आयी। आप शारीरिक यातनाओ के विरुद्ध भी रपर्ट दर्ज करा सकती है और दहेज मांगने के बाबत भी गुजारा भत्ते के लिये भी आप भारतीय दंड संहिता की धारा १२५ के अंतर्गत पुलिस व कोर्ट में जा सकती हैं या फिर राष्ट्रीय महिला आयोग में विस्तार से अपनी शिकायत भेज सकती हैं। गुजारा भत्ता केवल आपको ही नही, लड़कियों को भी मिलेगा।

. मैं २५ वर्षीय लड़की हूं। मुझे एक लड़के से प्यार है। हम दोनो के बीच शारीरिक संबंध हो गया, जिसका कारण मैं गर्भवती हो गयी हूं। मेरे पेट में दो माह का गर्भ है। वह लड़का मुझ से शादी करना चाहता है, लेकिन मेरे माता-पिता उसे पसंद नहीं करते। मरे गर्भवती होने की बात भी उन्हें पता नहीं है। मुझे क्या करना चाहिए, सलाह दें।
राखी शर्मा, कानपुर
आप बालिग है। यदि लड़का आपसे शादी करने के लिये तैयार है तो आपको रजिस्टर्ड मैरिज कर लेना चाहिये, वरना गर्भ की बात कितने दिनों तक छुपी रहेगी? फिर इस दौरान जो मानसिक तनाव होगा उसका गर्भ पर बडा असर पड़ सकता है। आपको तुरंत रजिस्टर्ड मैरेज कर
लेना चाहिये।

. मैने अपनी इच्छा से विवाह किया है, जिसके कारण मेरे पति के माता-पिता नाराज रहते हैं तथा मेरे पति के पास पैतृक संपत्ति के साथ-साथ उनके माता पिता द्वारा अर्जीत संपत्ति भी है। हमारे सास-ससुर दोनो संपत्ति में मेरे पति को हिस्सा देना नहीं चाहते, मुझे बताये कि हमे क्या कहना चाहिये?
सीमा जैन, दिल्ली
आपके संसुर की अपनी मेहनत से कमाई संपत्ति में आमके पति को कोई हक नहीं बनता है। पैतृक संपत्ति मे अवश्य ही आपके पति हक मांग सकते है और मिलने पर सिविल कोर्ट में केस कर सकते है। दूसरी ओर आप यह भी सोच सकती हैं कि यदि पति की कमाई ठीक-ठाक है तो और आप दोनों आपस में खुश हैं तो असल कमाई तो आप ने पा ली। आगे की सलाह इस बा पर निर्भर करेगी कि आपके पति के अन्य भाई-बहन कितने है और आपका उनसे व्यवहार कैसा है।
प्रस्तुति- अनिता कर्ण
२१ मार्च २००१
सहारा सलाह
समस्याएं महिलाओं की
-लीना मेहेंदले

. मैं सुबह ११.०० से २.०० बजे तक खाली रहती हूँ। मेरी रूचि सामाजिक कार्योमे है। इस खाली समय को मैं किसी सामाजिक कार्य मैं लगाना चाहती हूँ, मैने समाजशास्त्र व इतिहास मैं कोर्स किया है। सलाह दे कि हम समय का उपयोग कैसे किया जाए।
मीरा गुप्ता, ए ७६, सेक्टर-१७, नोएडा
आपको अच्छा खासा खाली समय मिल रहा है। आप इसका उपयोग कई तरह से कर सकती हैं।आप कोई शिशु-घर या झूला -घर चला सकती हैं। पास-पड़ोस के बच्चों को जो स्कूल नहीं जा पाते उन्हें पढ़ा सकती हैं।यदि कम्प्यूटर खरीद सकतीहो तो उस पर काम करने के लिए आपको काम भी मिल सकते हैं। आप कोई अन्य छोटा-मोठा व्यवसाय आरंभ कर सकी है, मसलन घरेलू दवाईयां बनाना, ब्यूटी पार्लर चलाना आदि। आपके पास-
पड़ोस मे सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाएं हो तो , आप उनके साथ काम कर सकती है। रामकृष्ण मठ, बहाई सेंटर आदि पूरे देश भर में बड़े पैमाने पर काम करनेवाले संगठनों के साथ भी आप जुड़ सकती हैं।

. मैं एक विधवा औरत हूँ। मेरे तीन लडके हैं। एक लडका विकलांग है। मेरे पति की मृत्यु को १२ वर्ष हो गए है। मै अपनी ससुराल में रहती हूँ। मेरे देवर हमसे अलग रहते हैं लेकिन हमेशा मुझे तथा मेरे बच्चों को परेशान करते रहते हैं। कभी २तो मारपीट पर उतर आते हैं और शराब पीकर गन्दी २ गालियां देते हैं। मेरे तीनों बच्चे पढ़ते हैं।उनकी ऐसी हरकतों से बच्चे परेशान रहते हैं। क्या मैं महिला आयोग में केस डाल सकती हूँ? कृपया मेरी समस्या का समाधान बताए।
रामवती, चिराग दिल्ली
आप बिलकुल बेझिझक पुलिस में या आयोग में केस डाल सकती है। क्योंकि शराब पीकर किसी महिला या बच्चे को पीटना एक बड़ा अपराध है और यदि वे आपसे अलग रहते हैं और
आपके घर में घुसकर मार-पीट करते हैं? फिर तो यह और भी बड़ा अपराध है। साथ ही आपके सास-ससूर, देवरानी या अन्य रिश्तेदारों के आपसे संबंध कैसे है- यह भी महत्वपूर्ण है। क्योंकि ऐसी हालत में आप उनसे भी मदद ले सकती हैं।

. मैं एम..पास घरेलू महिला हूँ। मैं जानना चाहती हूँ कि महिलाओं की स्थिति सुधारने का प्रयास सरकार किन संस्थाओं के माध्यम से करती है?
सुजाता तनेजा राजेन्द्र नगर दिल्ली
इसके लिए केन्द्र सरकारों व राज्य सरकारों में महिला एवं बाल का भी गठन किया जा चुका है। लोकसभा की एक संसदीय समिति भी बनायी गई है जो समय-समय पर जांच करतीं है कि महिलाओं की स्थिति कैसी है महिलाओं से संबंधित सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन पर नजर रखन के लिये खास विभाग बना हुआ है। नेशनल अकादामी ऑफ ऍडमिनिस्ट्रेशन जैसी देश के आला अफसरों को प्रशिक्षण देने वाली संस्था तथा उसकी सहयोगी राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थाओं मे भी स्त्री-पुरुष संबंधो और उनके विषम परिस्थितियों पर विचार करने के लिये कोर्सेस आयोजित किये जाते हैं।यू.जी.सी. ने भी देश के कई विश्वविद्यालयों में वूमेन स्टडी सेंटर खोल रखें है। जिनके माध्य से महिलाओं के संदर्भ में शिक्षा के स्तर पर शोध आदि कार्य किये जाते है।इनके अलावा राष्ट्रीय महिला कोष और केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड भी महिलाओं की समस्याओं से निपटने के लिये, उनके आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिये कार्यरत है। साथ ही केन्द्र सरकार व सभी राज्य सरकारें एक महिला नीति भी बना रही हैं। इन सभी माध्यमों व संस्थाओं के प्रयासों से महिलाओं की स्थिति में सुधार की अपेक्षा की जाती है।

. मै मेरठ का रहने वाला हूं। तीन वर्ष पूर्व मैंने अपनी बेटी की शादी दिल्ली में की थी। तब से उसके ससुराल वालों ने लड़की को हम लोगों से मिलने नहीं दिया है। दबाव के कारण लड़की भी मिलने से इनकार कर देती है।उसे न तो बाहर भेजा जाता है और न ही किसी से मिलने दिया जाता है।उसे लगातर प्रताड़ित किया जा रहा है। उसने एक बार आत्महत्या करने की भी कोशिश की। उसे ससुराल से बाहर कैसे निकाला जा सकता है, मुझे जानकारी दें।
अशोक शर्मा, मेरठ
आपकीसमस्याएक एसी दुखद समस्या है जिसका कई मां-बाप और लड़किया पीड़ित हैं। सोचने की बात यह है कि ससुराल में प्रताड़ना मिलने के बाद भी लड़की आपसे मिलने से क्यों इनकार करती है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि उसे यह आत्मविश्वास नहीं है कि ससुराल के बाहर निकल कर वह अपनी जिंदगी शांति से जी सकेगी या उसे मां-बाप की मदद मिल सकेगी। यदि वह बालिग हैं तो ससुराल का दबाव मानने के लिए बाध्य नही हैं। फिर भी यदि वह अपनी मर्जी से आपसे मिलने से इनकार करती है तो आप उससे मिलने की जिद्द नहीं कर सकते। हां इतना अवश्य है कि यदि आपको यह शंका है कि उसे ससुराल में कैदी की तरह रखा जाता है तो और उसे भागने का मौका नहीं मिल रहा है तो आप एक विस्तृत शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत पुलिस, दिल्ली महिला आयोग या राष्ट्रीय महिला आयोग के पास की जा सकती हैं।

. पिछले दो सालों से मेरा एक लड़के के साथ चल रहा है। लड़के ने मुझे शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बना लिया। अब शादी से इनकार कर रहा है। कानूनन मुझे क्या सहायता मिल सकती है, मुझे जानकारी दें।
रीना माथुर, दिल्ली
लड़के के साथ पहली बार संबंध बताते समय यदि आपकी उम्र १८ वर्ष से कम थी तब तो वह बलात्कार ही माना जायेगा। भले ही आपकी इच्छा से हुआ है लेकिन यदि ऐसी बात नही है तो इसे धोखाधड़ी का मामला कहा जा सकता है और भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया जा सकता है लेकिन सिद्ध करने में देरी हो सकती है। यदि किसी तरह लड़के को शादी के लिए समझाया गया तो ठीक है वरना कानूनन आप केवल धोखाधड़ी का केस
कर सकती हैं।
नोट- लीना मेहेंदले के यह व्यक्तिगत विचार और सुझाव है।
प्रस्तुति- अनिता कर्ण

देश की प्रगति मे महिलाओं का बहुत बडा योगदान होते हुए भी वह समाज और मर्दो की दुनिया में शोषण का शिकार है। कभी मर्द उसे छोड़ देता है तो कभी वह ससुराल की तरफ से पीड़ीत है। कभी-कभी मायके वाले भी उसके दुश्मन बन जाते हैं। हालांकि आज की आधुनिक नारी कुछ हद तक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हुई है, इसके पश्चात भी उसकी समस्याएं और सवालों को हम अखबार के माध्यम से हल करना चाहते है। महिलाओं द्वारा भेजे गये सवालों का जवाब देंगी जानी-मानी महिला समस्याओं की विशेषज्ञ व राष्ट्रीय महिला आयोग की संयुक्त सचिव लीना मेहेंदले। हमें महिलाओं के पत्रों की प्रतीक्षा रहेगी।




सहारा 21-3-2001

आदिवासी लड़कियों को धडल्ले से बेच रहे हैं मानव अंगों के सौदागर

अजय तिवारी/सहारा समाचार

नयी दिल्ली, २० मार्च। मानव अंगों का सौदा करने की नीयत से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में छोटी उम्र की आदिवासी लड़कियो को धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। लड़कियों के आश्रम और अनाथालयों पर छापा मारने के लिए आज महिला आयोग ने कलक्टरों को पत्र लिखा है। पहले इसकी इत्तला गृह मंत्रालय को दी गयी थी। आंध्र प्रदेश के नालगौंडा, देवरकुंडा निजामाबाद, मेहबूब नगर, विशाखापट्टनम और तमिलनाडु के धर्मपुरी में लड़कियों का गुर्दा और दूसरे अंगों का सौदा करने का खूब धंधा हो रहा है। लम्बाड़ा जनजाति की लड़कियां आंध्र प्रदेश मे इसका सर्वाधिक शिकार हैं। बेहद गरीब ये आदिवासी पत्थर तराशकर और जंगल से लकड़ियां काटकर अपना पेट भरते है।
नालगौंडा करबे के दस ताल्लुकों में मानव अंगों की खातिर लड़कियों की खरीद-फरोख्त जारी है। पुलिस ने इस सिलसिले में ५८ मामले दर्ज किये हैं और ३० बच्चों को मानव अंगो के सौदागरों के चंगुल से छुड़ाया है। महिला आयोग के अनुसार कई कस्बों में महिला के गर्भ का भी सौदा हो जाता है। धर्मपुरी. (तमिलनाडु) के हुसूर कस्बे के बहुसंख्यक अनाथालयों की गतिविधियां संदिग्ध पायी गयी है। यह कस्बा पहले ही भ्रूण हत्या के लिए बदनाम था। अब हुसूर का नाम मानव अंगो के सौदागरों के केंद्र के रूप में लिया जाने लगा है।राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम ने वहा के कई अनाथालयों का दौरा किया था। अनाथालय तीन माह से लेकर तीन वर्ष तक की आदिवासी लड़कियों को बड़ी तादाद में अपने यहां रखे हुए है।
(शेष पृष्ठ १० पर)

अनाथालयों और लड़कियों के
आश्रमों पर कारवाई के लिए आज महिला आयोग ने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कलक्टरों को पत्र भी लिखा।आयोग ने कलक्टरों को कहा है कि वे उन सभी अनाथालयों की तलाशी लें जहां २० या उससे अधिक लड़कियो को रखा गया है।
महिला आयोग की सदस्य शांता रेड्डी ने कहा कि लड़कियो के मानव अंगो का सौदा सामाजिक संगठनों के माध्यम से हो रहा है। उन्होंने आशंका जतायी कि कई लड़कियों को इस नीयत से विदेश भी भेजा गया है। शांता रेड्डी इस मामले की जांच कर रही है।
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राष्ट्रीय सहारा
१८//२००१ के लिये

नोट:- यह लीना मेहेंदले के व्यक्तिगत विचार और सुझाव हैं।

प्रश्न १:- शादी के सात वर्ष बाद पति आपसे दहेज माँगना शुरु करे यह बात कुछ समझ में नही आती। आप शारिरिक यातनाओंके विरुध्द भी रपट दर्ज करा सकती हैं और दहेज माँगने के बाबत भी। गुजारा भत्तेके लिये भी आप भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १२५के अंतर्गत पुलिस व कोर्ट में जा सकती हैं। या फिर राष्ट्रीय महिला आयोग में विस्तार से अपनी शिकायत भेज सकती हैं। गुजारा भत्ता केवल आपको ही नही, लडकियों को भी मिलेगा।

प्रश्न २:- आप बालिग हैं। यदि लडका आपसे शादी करने के लिये तैयार है तो आपको रजिस्टर्ड मॅरिज कर लेना चाहिये, वरना गर्भ की बात कितने दिन छुपी रहेगी? फिर इस दौरान जो मानसिक तनाव होगा उसका गर्भ पर बुरा असर पड सकता है। आपको तुरंत
रजिस्टर्ड मॅरिज कर लेना चाहिये।

प्रश्न ३:- आपके ससुर की अपनी मेहनतसे कमाई संपत्ति में आपके पति का कोई हक नही बनता है। पैतृक संपत्ति में अवशय ही आपके पति हक माँग सकते हैं और न मिलता हो तो सिविल कोर्ट में केस कर सकते हैं। दूसरी ओर आप यह भी सोच सकती हैं कि यदि पति की कमाई ठीक ठाक है और आप दोनो आपस में खुश हैं तो असल कमाई तो आपने पा ही ली। आगे की सलाह इस बात पर निर्भर करेगी कि आपके पति के अन्य भाई-बहन कितने हैं और आपका उनसे व्यवहार कैसा है।

प्रश्न ४:- तुम्हारा शारिरिक शोषण क्या होता है, यह तुम्हें खुलासेवार बताना चाहिये। बच्चों को मारपीट करना कानून की आँखों में गंभीर अपराध है और आप पुलिस में या महिला आयोग या अपने राज्यके मानवधिकार आयोग में जा सकती हैं। लेकिन उससे पहले क्या तुम्हारे ऐसे कोई रिश्तेदार नही बचे, जो तुम्हारे पिता को समझा
सकें, मसलन दादा-दादी, चाचा, बुआ, नानी, मामा, मौसी इत्यादि? तुम अपने स्कूल के प्रिंसिपल से भी बिनती कर सकती हो कि वे पिता को बुलाकर समझायें। क्या तुम्हारे सौतेले भाई बहन हैं? यदि हाँ तो तुम बडप्पन के नाते उनसे कैसा व्यवहार करती हो यह भी तुम्हें देखना पडेगा।

प्रश्न ५:- अभि के कानून के मुताबिक सौतेले बेटेसे गुजारा भत्ता नही माँगा जा सकता।

प्रश्न ६:- मैं एक मुसलमान लडकी हूँ। मेरे पतिने दूसरी शादी करके मुझे व बच्ची को मायके भेज दिया है और कोई गुजारा नही देता। कोर्ट में उसने केस दे दी है कि वह मेहर की रकम तथा तीन महिने के गुजारे की रकम मुझे देने की पेशकश कर चुका है। लेकिन मैंने मना कर दिया था इसलिये उसे तलाकशुदा घोषित किया जाय। क्या मुझे कोई हक नही?
नसरीन, फरीदाबाद

मुसलमान धर्मग्रंथों के मुताबिक भी पति दूसरी शादी तभी कर सकताहै, जब वह दोनों बीवियोंसे समान रूप से व्यवहार करे और दोनों का समान रूप से खयाल रखे। तलाक चाहने पर गुजारा भी केवल ३ महीने का नही बल्कि पूरी उमर का देना पडेगा, जैसा कि हाल में मुंबई हायकोर्ट ने फैसला दिया है। इसके अलावा आप भारतीय दंड- प्रक्रिया संहिता की धारा १२५ में भी कोर्ट से गुजारा भत्ते की माँग कर सकती हैं।
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Series 3 (for 18.03.2001)

[Attention to Sh.Chand Khan Rehmani, Rashtriya Sahara]

उत्तर १- बारह वर्ष की शादी के बाद आप एक बुरी उलझन में फँस गई हैं। कानूनन आपको तलाक देने के लिये कोई बाध्य नहीं कर सकता और पत्नी का आपका हक नहीं छीन सकता।आपके कोई बच्चा नहीं हुआ, यह भी तलाक का कारण नही बन सकता। चूँकि पति की- अनिच्छा से ही संबंध टला है, अतः कानूनन आपका पत्नी बने रहने का अधिकार सुरक्षित है। व्यावहारिक उलझन के लिये आपको कोई दूसरा उपाय खोजना पडेगा, मसलन किसी अच्छे काम में जुट जाना। वैसे ससुराल वालों से मिलकर आप पति को समझाने का भी प्रयास कर सकती हैं।आप जैसी दूसरी बहनों के लिये यही कहूँगी कि वे समस्या का हल खोजने में इतनी देर न करें।

उत्तर२- ब्लेकमेल करना एक अपराध है और इस केस में तो कडी सजा मिल सकती है। अतः आप पुलिस की सहायता से व्लेकमेलर को पकडवाने का
प्रयास करें।

उत्तर ३- आप बालिग हैं अतः आपकी इच्छा विरुद्ध न तो कोई आपको संरक्षण गृह में रख सकता है न शादी करवा सकता है।आपकी शिक्षा कहाँ तक हुई है? परिवार में प्रारंभिक सहायता कौन कौन दे सकता है, ये सब जाने बगैर आपकी अन्य समस्याओं का उत्तर नहीं दिया जा सकता ।

उत्तर ४- Keep pending for next issue.

उत्तर ५- आपकी उमर १७ साल है अर्थात कानूनन अभी आपको न शादी करने की अनुमति है और न शारीरिक संबंध बनाने की।अच्छा होगा यदि आप एक और साल तक केवल पढाई में मन लगाइये १८ वर्ष की आयु पूरी होने पर आपको शादी की अनुमति मिलेगी। वैसे दोनों परिवार हिंदू विधान से शादी करवाते हैं तो उसे कानूनन मान्यता है।




समस्याएं महिलाओं की


- मै १८ वर्षीय १० वीं पास
लड़की हूँ। मेरे पिता ने १० वीं के बाद पढ़ाई बन्द कर दी है। वे पढा़ना नही चाहते जबकी मैं पढ़ना चाहती हूँ। दो सालों से मै घर में एक बन्दी की तरह रह रही हूँ। मेरा भविष्य बिल्कुल अन्धकारमय हो गया है। कृपया मुझे रास्ता दिखाएं।
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२५ अप्रैल२००१
सहारा सलाह
समस्याएं महिलाओं की
-लीना मेहेंदले

. मेरे पति की उम्र २२ वर्ष तथा मेरी उम्र २० वर्ष है। मेरी शादी को एक वर्ष हुआ है। मेरे पति दिल्ली में नौकरी करते हैं। इसलिये वे महीने में एक दो दिनों के लिये ही घर आते हैं। घर में मैं अकेली औरत हूं। सास या ननद नहीं है सिर्फ देवर व ससुर हैं। मेरे ससुर मेरे ससुर की उम्र लगभग ४२वर्ष है। वे जवान और सुन्दर हैं। शुरू मे उनका व्यवहार मेरे साथ दोस्ताना था जिसके कारण मै उनके करीब आ गायी। अब हम दोनों के बीच संबंध बन गया हैं। कहीं यह बात मेरे पति को न पता चल जाये। मैं क्या करू बड़ी उल्झन में हूं सुझाव दें।
सुनीता, मेरठ
कानून की दृष्टि में आपके ससुर अपराधी है और आपके पति शिकायत करें तो आपके ससुर को दंड हो सकता है, लेकिन आपकी असली समस्या कुछ और है। ससुर के साथ संबंध खत्म करना ही उचित होगा। अच्छा हो कि कुछ दिनों के लिये आप मायके चली जाये बाद में पति के साथ अलग रहना शुरू करें।आप अपने देवर की शादी करने के बाद जहां तक संभव है, आपको अपने ससुर की दूसरी शादी करवा देनी चाहिये, लेकिन इसके लिये आपको अपना मन मजबूत करना पड़ेगा। यदि आप का ही मन ससुर के लिये लालायित रहेगा तो इस समस्या का अन्त नहीं है।

. मैं ३२ वर्षीय महिला हूं। मैने अपनी पसंद से शादी की थी। उस समय मेरी उम्र २२ वर्ष तथा मेरी पति की उम्र २० वर्ष थी। हमारी शादी आर्यासमाज रीति से हुई थी।मेरी शादी में मेरे तथा मेरे पति के अभिभावक नही आये थे। इस लिये दोनों ने ही इस शादी को स्वाकार नही किया। अब वर्षो बाद वे लोग (ससुराल वाले) मेरे पति को समझा-बुझाकर दूसरी शादी करना चाहते है, जबकि मेरी एक बेटी भी है। अब वे हमें का भरण-पोषण के लिये पैसा भी नहीं देते। वे इस शादी को ही अवैधानिक साबित करना चाहते हैं।
मुझे सलाह दें, मै क्या करू?
सुप्रिया त्रिपाठी, गोरखपुर
यदि आपने शादी के बाद दस वर्ष पति के साथ गुजारे हैं तो क्या वे गुमनाम रह कर बिताये थे? आपके रिश्तेदारों को पता होगा। बेटी के जन्मदिन पर, अन्य त्यौहार में या ससुराल में किसी शादी व्याह के समारोह में, कई जगह आप शामिल हुई होंगी। इन सारे प्रमाणों को मिटाना आसान नही है। बच्ची को आपने नर्सरी स्कूल में डाला होगा। वहां पिता के नाम पर आपके पति का नाम लिखा होगा। राशन कार्ड भी होगा। इसलिये आपको अपनी समस्या विस्तार से बताना होगा।आर्यासमाजी ढंग से भी जिस मंदिर में आपकी शादी हुई है, वहां उसका रिकार्ड भी होगा। आप के पास शादी का प्रमाणपत्र है या नही? आपकी समस्या से और लोगों को सबक लेना चाहिये कि शादी को अवश्य पंजीकृत कराये।

. मैं ४२ वर्षीय महिला हूं। आज से बीस वर्ष पूर्व मेरी शादी हुयी थी। सब कुछ वर्षों तक तो समान्य ढंग से चलता रहा। लगभग आठ वर्ष
पूर्व मेरे व मेरे पति के बीच वैचारिक तनाव उत्पन्न हो गया, जिसके कारण हम दोनों का अलगाव हो गया। लगभग ७ वर्षों से मैं तथा मेरी १८ वर्षीय बेटी अलग रह रहें हैं। मेरे पति मुझे तथा मेरी बेटी को भरण-पोषण तक के लिये पैसा नहीं देते। यहां तक कि छह वर्ष पूर्व उन्होंने मुझ से बिना तलाक लिये दूसरा विवाह भी कर लिया है। मुझे सलाह दें क्या करना चाहिये?
लोपामुद्रा, कानपूर
जहां तक पति के दुसरा विवाह का प्रश्न है, आप तुरंत पुलिस में उनके विरुद्ध केस दर्ज करा सकती है, जिसके उन्हें सजा हो सकती है। इसके अलावा आप गुजारा- भत्ता पाने के लिये कोर्ट में आवेदन दे सकती है और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा १२५ के अंतर्गत आपको तथा आपकी लड़की को अलग-अलग- भत्ता मिल सकता है। लड़की को तब तक गुजारा मिल सकता है, जब तक उसकी शादी न हो जाती है। आपकी अपनी आय चाहे जितनी हो, फिर भी आपकी बेटी पिता से तथा आप अपने पति से गुजारा मांग सकती है।

. मैं २४ वर्षीय महिला हूं। दो वर्ष पूर्वमेरी शादी हुयी थी। मैं एक निजी संस्थान में नौकरी करती हूं। पिछले डेढ सालों से आपसी मतभेद के कारण हम अलग-अलग रह रहे है। अब स्थिति यह है कि न तो हमारे बीच सुलह हो पा रही है और न तलाक की ही स्थिती है। मुझे सलाह दें।
सरोज गोयल, मेरठ
आप दोनो के बीच सुलाह होगी या नही यह केवल आप दोनों पर ही निर्भर करता है। आप अपने रिश्तेदारों की तथा परिवार की मदद ले सकती हैं या राष्ट्रीय महिला आयोग में भी जा सकती है, जहां आपकी सुलह या आपसी सलाह से तलाक या संपत्ति का आदान-प्रदान आदि बातें तत्काल पूरी हो सकती है।

. मेरी शादी के दस वर्ष हो गये है, तब से मै संयुक्त परिवार मे रहती आ रही हूं। मेरे साथ सास, जेठानी, देवरानी व एक ननद है। मेरी सास का व्यवहार हमेशा से ही मेरे साथ खराब रहा है, लेकिन इधर देवरानी के घर में आने के बाद वे खुलेआम
अपमान व उत्पीड़ीन करने लगी हैं। पति से कहने पर वे मेरी ही गलती बता कर चुप रहने को कहते हैं। मुझे बतायें कि ऐसी परिस्थिति मे मैं क्या करूं?
रीता वर्मा, रामपुर
शादी के बाद दस वर्ष तक आप संयुक्त परिवार मे रही हैं। अब सबसे छोटी देवरानी के आने के बाद उसे सम्मान मिल रहा है और आपको उत्पीड़न तो आपको अपना व्यवहार भी कही न कही जांच परखकर देखना चाहिये।कई बार ऐसा भी हो जाता है कि बड़े परिवार का एकाघ सदस्य बद अच्छा बदनाम बुरा वाले मुहावरे की तरह आंख का काटा बन जाता है, भले ही उसकी कोई और वजह हो या न हो। यदि मनमुटाव बहु गहराई तक पैठ गया है तो इसका इलाज मुश्किल है। आप पति से सलाह कीजियें और घर वातावरण सुलझाने में आपसे जो बन सकता है कीजिये।
नोट- लीना मेहेंदले के यह व्यक्तिगत विचार और सुझाव हैं।
प्रस्तुति- अनिता कर्ण










प्रभा मन्डावली

रविवार, 2 अक्टूबर 2016

September Blow To ‘Death Penalty

September Blow To ‘Death Penalty’
By: Ashok KM | September 30, 2016



September has been a heaven-sent month for seven persons whose death penalty awarded by high courts for committing heinous crimes like rape and murder was commuted by the Supreme Court. The judgments pronounced this month in their criminal appeals also raise a suspicion whether the apex court is becoming more and more reluctant to award death penalty. The Bench comprising Justice Ranjan Gogoi, Justice Prafulla C. Pant and Justice Uday Umesh Lalit set aside death penalty in six cases, of which four were rape-cum-murder cases and the other two being multiple murder cases. Out of six cases which came before the Bench, it acquitted the accused in one case, acquitted the accused of murder charges in two other cases, and commuted death penalty in other three cases. Another Bench comprising Justice Chelameswar, Justice Shiva Kirti Singh and Justice Abhay Manohar Sapre commuted death penalty in one rape-cum-murder case. September 1: Triple murder case (Madhya Pradesh) A three-judge Bench of the apex court comprising Justice Ranjan Gogoi, Justice Prafulla C. Pant and Justice Uday Umesh Lalit commuted the death penalty awarded to one Shyam Singh from Madhya Pradesh after he was found guilty of committing parenticide and murdering his nephew. September 8: Rape-cum-murder of 7 year old (Madhya Pradesh) The same Bench acquitted a rape-cum-murder accused of murder charges and upheld life imprisonment and conviction under Section 376 (2) (f) and 377 IPC. (Rajesh vs. State of Madhya Pradesh) September 15: Soumya rape-cum-murder case (Kerala) The Bench acquitted Govindachami, the accused in Soumya rape-cum-murder case, of murder charges, while upholding the conviction and sentence under Section 376 IPC for rape and other offences. (Govindaswamy vs. State of Kerala) September 15: Multiple murder case (Jammu and Kashmir) The Bench commuted death penalty of one Ghulam Mohi-Ud-Din Wani from Jammu and Kashmir, who was convicted for his involvement in the death of one Mohd. Yousuf Ganai and his family members, and also for the murder of one Mohd. Ishaq Bhat. (Ghulam Mohi-Ud-Din Wani vs. State of J & K) September 18:  Rape-cum-murder of 7 year old (Madhya Pradesh) Another SC Bench comprising Justice Chelameswar, Justice Shiva Kirti Singh and Justice Abhay Manohar Sapre commuted the death sentence awarded by a trial court and confirmed by the High Court of Madhya Pradesh for a man accused of raping and murdering a 7-year-old girl, to life imprisonment with the further direction that he shall not be released from prison till he completes the actual period of 25 years of imprisonment. September 21: Rape-cum-murder of 7 year old (Madhya Pradesh) The SC Bench headed by Justice Ranjan Gogoi commuted the death penalty imposed by the trial court and the high court on Kamlesh @ Ghanti, who was found guilty of raping and murdering a 7-year-old girl. September 23: Murder of wife and five kids (Chhattisgarh) The Bench acquitted Dhal Singh Dewangan, who was sentenced to death by the Chhattisgarh High Court for killing his wife and five minor children by a 2:1 majority. Justices Ranjan Gogoi and U.U. Lalit have set aside the high court judgment that confirmed the death penalty while Justice Prafulla C. Pant upheld the judgment. Interesting facts Similar ratio, similar sentencing in two cases Interestingly, there is quite similarity in reasoning and alteration of sentences in judgments of 8th (Rajesh vs. State of Madhya Pradesh) and 15th September (Govindaswamy vs. State of Kerala). In both cases, the Bench headed by Justice Ranjan Gogoi acquitted the accused of murder charges, and upheld life imprisonment for rape. Ambiguity with respect to injury that caused the death was prime reason for setting aside the conviction under Section 302 IPC and converting it to conviction under Section 325 IPC for grievous hurt, in both the cases. Apparently, the Soumya rape-cum-murder case was finally heard by the Bench on 8th September, the day on which the other judgment was pronounced by the same Bench. First 376A IPC conviction? Another notable fact is that in Kamlesh @ Ghanti case, the court, perhaps for the first time, upheld a conviction under Section 376A IPC, which was incorporated by the Criminal Law (Amendment) Act, 2013 (introduced after Nirbhaya incident), while sentencing the accused for imprisonment for his rest of natural life. The amendment came into force on 3.4.2013, and the date of occurrence of crime was 18.04.2013. Lack of active participation in murder a factor against awarding death penalty? The Bench in Ghulam Mohi-Ud-Din Wani vs. State of Jammu & Kashmir made an important observation that the absence of active participation in murder should go into the judicial determination of the question of appropriate punishment.

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सोमवार, 2 नवंबर 2015

बलात्कारीसाठी फांशीची शिक्षा-- दै. केसरी १९९८

२५/११९८
बलात्कारीसाठी फांशीची शिक्षा

फार वर्षांपूर्वीची गोष्ट . पंडित नेहरूंनी नुकतीच घोषणा केली होती की सर्व साठेबाजांना भर चौकांत जबर शिक्षा दिली पाहिजे (फाशी की चाबकाचे फटके की आणखी कांही ते आता आठवत नाही.) घोषणा ऐकून लोकांचा उत्साह खूपच वाढला होता. देशांतील साठेबाज व्यापाऱ्यांना हुडकून काढून त्यांना धडा शिकवणारी शिक्षा मिळेल आणि त्याचा योग्य परिणाम होऊन साठेबाजी संपुष्टात येईल अशी आशा सर्वांना लागून राहिली. कृतीला थोडा वेळ लागणारच म्हणून धैर्याने तीन वर्ष, पाच वर्ष लोकांनी वाट पाहिली. हळू-हळू आशा मावळू लागली व त्या जागी कडवटपणा आला. पंतप्रधान असूनही नेहरू एकाही साठेबाजाला हुडकू शकले नाहीत की कोर्टासमोर उभे करू शकले नाहीत, मग जबर शिक्षा देण्याची गोष्टच सोडा. मी माझे मत मांडले आणि कर्तव्यमुक्त झालो असे नेहरूंना वाटले असावे. पण देशाचे प्रशासन जो कोणी चालवीत असेल त्याला इतक्या सहजासहजी- निव्वळ इच्छा व्यक्त करून कर्तव्यमुक्त होता येत नाही. अंमल बजावणी झाली, नीट झाली आणि तिचे दृश्य व दीर्घकालीन टिकू शकणारे परिणाम निर्माण झाले की मगच प्रशासकाची जबाबदारी संपते.

आता पुनः एकदा गृहमंत्रीपदावरून अडवाणी यांनी बलात्कारी व्यक्तीला शिक्षा दिली पाहिजे अशी घोषणा केली आहे (अजून भर चौकाबद्दल कांही ऐकू आलेले नाही) त्यामुळे कदाचित तेही कर्तव्यमुक्तीच्या आनंदात मश्गूल असतील. पण नेहरूंच्या काळात झाल्या तशा लोकांच्या आशा मात्र पल्लवित झालेल्या दिसत नाहीत. कारण अशा घोषणांची पूर्तता कां होत नाही हे गृहमंत्रालयाला कळले नसले तरी लोकांना थोडेफार कळू लागले आहे.
बलात्काराची घटना घडल्यापासून प्रत्यक्ष शिक्षा होईपर्यंत किती वेळ लागतो? याचे उत्तर देण्यासाठी मर्त्यलोकाची कालगणना (म्हणजे दिवस, महीने, वर्षशतकं, युगं ) अगदीच निरुपयोगी असून ब्रह्मलोकाची कालगणना जास्त उपयोगी आहे (तिथला एक दिवस म्हणजे पृथ्वीतलावरील सुमारे पाच हजार वर्ष असतात म्हणे.) पण कालगणने शिवाय इतरही अडचणी आहेत, आधी त्यांचाही परामर्श घेतलेला बरा.

गृहखात्याकडून दरवर्षी प्रकाशित होणाऱ्या पुस्तकावरून दिसून येते की १९९१ पासून दरवर्षी दहा हजारा पेक्षा जास्त बलात्काराचे गुन्हें नोंदवले गेलेले आहेत. याचा अर्थ असा की देशांत दर तासाला कुठे न कुठेतरी
किमान एक बलात्काराचा गुन्हा घडत असतो. या शिवाय कित्येक बलात्काराचे गुन्हे पोलिसांपर्यंत येत नाहीत किंवा इतरही पुष्कळसे गुन्हे बलात्काराचे असूनही त्यांची नोंद मात्र बलात्काराऐवजी दुसऱ्या एखाद्या सौम्य गुन्ह्याचीच होते, त्यांचा हिशोब गृहखात्याचा अहवालात होऊ शकत नाही. बलात्काराचा गुन्हा घडला असूनही तशी नोंद न होऊ देण्यास ज्या कायद्याच्या त्रुटि कारणीभूत आहेत, आणि जे सरकारी अधिकारी त्या नोंदीवर पांधरूण घालण्यास कारणीभूत आहेत, त्यांच्यावर कांय कारवाई करणार ती घोषणा देखील होण्याची गरज आहे, व त्याची अंमलबजावणी देखील होण्याची गरज आहे.

हा अपराधच असा आहे की ज्यामधे होरपळलेल्या स्त्रीला समाजाकडून सहानुभूति व मदत मिळण्याऐवजी शरमिंद व्हाव लागत. तिच्याकडे अंगुलीनिर्देश केला जातो. तिच वैवाहिक जीवन उधळल जाऊ शकत. तिच चरित्र शंकास्पद ठरवल जाऊ शकत. या सर्व गोष्टींचा दहादा विचार करून मगच ती स्त्री किंवा तिचे नातेवाईक फिर्याद दाखल करतात. शिवाय या अत्याचाराचे स्वरूपच अत्यंत जघन्य आणि त्या स्त्रीचे मनोबल खच्ची करून टाकणारे असते.अशी शरीराने आणि मनाने खचलेली स्त्री फिर्याद नोंदवण्यासाठी पुढे येऊ म्हणाली तरी आपल्याकडे फिर्याद नोंदवून घेण्याची पद्धत खूपच अमानवीय आहे. त्या स्त्रीला ज्या कुणांबद्दल विश्वास वाटत असेल, ज्यांचा आधार वाटत असेल, त्यांच्या समोर किंवा त्यांच्याकडे तिने फिर्याद नोंदवायला काय हरकत आहे?

डायिंग डिक्लरेशनच्या बाबतीत अशी सोय आहे की मृत्यूसमीप असलेल्या व्यक्तीने आपल शेवटच बोलण कुणाबरोबरही केल असल तरी ऐकणारी व्यक्ति त्या क्षणापुरती नोंद घेणाऱ्या पोलिसाच्या भूमिकेत शिरते.
दुसरा नियम म्हणजे बलात्कारित स्त्रीने गुन्हा नोंदवण्यासाठी पोलिस ठाण्यांतच गेले पाहिजे. तिथे तिच्यासमोर बसलेली सर्व पुरुष मंडळी आणि एकूण सर्वच वातावरण भांबावून टाकणार असत.तिला मानसिक धीर मिळून तिने आपल्यावर घडलेल्या अत्याचाराचे योग्य वर्णन करावे असे वातावरण आजूबाजूला नसते. त्यात जर ती स्त्री गरीब असेल तर तिचे अजूनही हाल होतात.

बलात्कारीत स्त्री एकदा त्या अत्याचारांने बळी पडलेली असतेच. पण कोर्टात तिची कसे उभी राहिल्यानंतर तिची उलटतपासणी करणारे वकील तिला त्याच त्या वेदना पुनःपुन्हा भोगायला लावतात. माझ्या मते आपली
न्याय पद्धती सुधारण्याची फार तातडीची गरज आहे. तिथे सर्वत्र सत्याचा घोष दुमदुमत असतो पण सत्याची चाड कुणालाच नसते. सत्य टिकले तरच समाज टिकतो, किंवा मोठा होतो व त्या मोठेपणाचा फायदा आपल्याला पुढे मिळू शकतो हे सूत्र वकील मंडळी विसरलेली आहेत. त्या ऐवजी वकीलांची अशी समजूत असते की आपला अशील येनकेन प्रकारेण (त्या येनाकेनात, खोट बोलण हे सर्रास मान्य असत) सुटला तरच आपण मोठे होतो.सर्व वकीलांनी हा विचार करायची वेळ आलेली आहे की आपला अशील सोडवणे हे प्रथम कर्तव्य आहे की समाजात सत्य टिकवणे हे प्रथम कर्तव्य आहे. ज्यांना सत्य टिकून रहाणे हे प्रथम कर्तव्य वाटत असेल त्यांनी एकत्र येऊन एक मोठी चळवळ राबवण्याची गरज आहे.

बलात्काराच्या केस मधील उलट तपासणीचे सवाल-जवाब वाचतांना मला हटकून एका कादंबरीची आठवण होते- टू किल ए मॉकिंग बर्ड. त्यामधे एका गोऱ्या मुलीने नीग्रो मुलावर बलात्काराचा खोटा आरोप केलेला असतो. कोर्टात त्या मुलीची उलटतपासणी करतांना व तिचा खोटारडेपणा दाखवून देतांना आरोपीचा वकील ज्या हळूवारपणे करतो, ते छोटेखानी वर्णन वाचतांना मी थक्क होऊन गेले होते. असेल ती एक काल्पनिक
कादंबरी पण त्यातून समाजाच्या उच्चतम मूल्यांची आपल्याला कल्पना येते. या उलट आपल्याकडे सत्य जपणे आणि फिर्यादी स्त्रीची मनःस्थिती जपणे हे आरोपीच्या वकीलासमोर पहिले उद्दिष्ट नसल्यामुळे फिर्यादीचे चारित्र्यहनन आणि अतोनात मानसिक क्लेश हाच उपाय आरोपीचे वकील वापरतांना दिसतात. खूपदा या प्रकारच्या उलट तपासणीला घाबरूनही फिर्यादी व्यवस्थित पणे साक्ष देऊ शकत नाही.

भारतीय एव्हिडन्स अॅक्ट मधे याबद्दल एक अत्यंत अजब तरतूद आहे. न्यायालयात बलात्काराचा किंवा विनयभंगाचा खटला उभा राहिल्यानंतर आरोपीचे (पुरुष) पूर्वचरित्र कसे आहे हा मुद्दा तपासता येत नाही.  मात्र फिर्यादी म्हणजेच जिच्यावर जुलूम आणि अत्याचार घडला आहे अशा स्त्रीचे पूर्वचरित्र कसे आहे हे तपासण्याची परवानगी आहे. या विरोधात आवाज उठवला गेला पाहिजे.

बलात्कार केसमधे मेडिकल तपासणी ही अत्यंत आवश्यक ठरते. खूपदा तपासणी करणाऱ्या डॉक्टरवर विश्वास बसू नये अशी परिस्थिती असते. तसेच डॉक्टरांना आढळलेली वस्तुस्थिती व त्याआधारे कादलेले निष्कर्ष तत्काळ जाहीर केले जात नाहीत त्यामुळे त्यामधेही मागे पुढे ढवळाढवळ होण्याची शक्यता वाढते.

नुकतीच चेन्नई येथे घडलेली घटना. चित्रा नामक बाईच्या नवऱ्यावर मोठी चोरी केल्याचा संशय असल्याने त्याला पोलिसांनी ताब्यात घेतले होते.  रात्री आठच्या सुमारास पोलिसांनी अचानक चित्राच्या घराची झडती घेतली पण त्यांत कांही सापडले नाही. त्यानंतर रात्री बाराच्या सुमारास पोलिस एका जीप मधे चित्रा आणि तिच्या पुतण्याला घेऊन गेले. चौकीत पुतण्याला दुसऱ्या खोलीत ठेवून इकडे चित्रावर जुलूम करण्यांत आला. नंतर रात्री तीनच्या सुमारास एका एसीपी ने दोघांना पोलिस व्हॅन मधून घरी पोचवले. चित्राची एकूण अवस्था तिच्यावर सामूहिक बलात्कार झाल्याचे दर्शवित होती. सकाळी सातच्या सुमारास तिने स्वतःला पंख्याला टांगून आत्महत्या केल्याचे आढळले. तिच्या डॉक्टरी तपासणीचा अहवाल आज सुमारे महिन्यानंतरही जाहीर केलेला नाही आणि बलात्कार बाबत मेडिकल तपासणीच झाली नाही असाही लोकांचा संशय आहे. कहर म्हणजे तपासणी करणारी डॉक्टर ही त्या झोन मधेच काम करणाऱ्या एका पोलिस अधिकाऱ्याची बायको आहे.

प्रश्न- देशभरात बलात्काराच्या गुन्ह्याचा तपास करु शकणाऱ्या फॉरेन्सिक लॅब्स किती? तिथे लागणारा वेळ किती? लॅब शिवाय साध्या तपासणीत निघणाऱ्या निष्कर्षांवरून केस उभी रहात नाही कांय?

प्रश्न- बलात्कार पूर्ण झाला तरच शिक्षा मिळते. पण प्रक्रिया सुरू झाल्यापासून जी मानसिक /शारिरीक यातना भोगावी लागते त्याचे निराकरण कांय?

प्रश्नसध्या बलात्कारासाठी जास्तीत जास्त जन्मठेप ही शिक्षा आहे, पण बहुधा पाच ते सात वर्ष कैदेचीच शिक्षा दिली जाते. जन्मठेपेची शिक्षा अत्यंत क्वचितच दिली जाते. यावर उपाय काय?

दिल्लीत सध्या तीन वर्ष जुन्या केसेस सुनावणीसाठी घेतल्या जात आहेत आणि चारशे वर केसेस कोर्टात पडून आहेत. यामुळे होते कांय कि झालेल्या अत्याचाराच्या जखमा बुजत असतानाच पुनः खपली ओरबाडली जाऊन पुनः त्या यातना भोगणे नकोसे वाटते. त्यामुळे कित्येक स्त्रिया व नातेवाईक या केसेसचा पाठपुरावा करण्यास किंवा कोर्टासमोर वारंवार येण्यास अनुत्सुक असतात.

सामान्यपणे एखादा गु्न्हा तपासत असतांना किंवा त्याची सुनावणी करतांना, तसेच त्याबाबत शिक्षा ठरवतांना त्यामागचे उद्दिष्ट- motive तपासले जाते. बलात्काराच्या बाबतीत मात्र गुन्ह्याचे  प्रकार आणि उद्दिष्ट ठळकपणे निराळे असूनही त्यांची तपासणी मात्र एकाच ठोकळेबाज पद्धतीने केली जाते. कित्येकदा बलात्कार करतांना त्या स्त्रीच्या मनांत कायमपणे दहशत बसवावी, तिचा विरोधी आवाज दाबून टाकावा, किंवा तिच्या समाजाचा विरोधी आवाज दाबून टाकावा, किंवा तिच्या घरातल्या  अथवा समाजातल्या कुण्या व्यक्तिने केलेल्या गुन्ह्याची शिक्षा म्हणून बलात्कार केला जातो. त्यामागे नुसता शारीरिक बलात्कारच नव्हते तर मानसिक खच्चीकरण हा उद्देश असतो. त्या स्त्रिचा, किंवा तिच्या घरादाराचा किंवा तिच्या समाजाचा देखील माणूस म्हणून जगण्याचा हक्क हिरावून घेण्याचे उद्दिष्ट असते. यासाठी वेगळी जास्त शिक्षा देण्याची मागणी आपण करणार की नाही? 
Attempt to murder असा गुन्हा असतो तसेच Attempt to rape असा वेगळा गुन्हा असला पाहिजे.
IPC मधे संपूर्णपणे वेगळे section त्यासाठी घालावे. ही झाली कायद्यांच्या पुस्तकांत कांय असावे ती बाजू.
Medical Jurisprudence मधे देखील कित्येक सुधारणा आवश्यक आहेत.

बलात्काराची फिर्याद नोंदवण्याची पद्धत बदलावी- १९७९ मधे National Police Commission ने असे म्हटले आहे की बलात्काराच्या केसेसची तपासणी करण्यासाठी खास प्रशिक्षित पोलिसांची गरज आहे etc. 
इथून पुढे तपासावे  --
Trq. In forensic techniques. Read National Police Commission Report of 1979. Not below a certain route office to investigate? Or to take the FIR? Why not someone having medico-Legal background &  nominated by the viction? Even among doctors?
What about DNA tests? What is their scope?

आता प्रत्यक्ष न्यायालयात किती उशीर लागतो ते पाहू या. न्यायाधीशांचा दृष्टिकोण आरोपीला सोडून देण्याचा किंवा benefit of doubt देण्याचा असतो. Extennating circumstances या कारणासाठी (म्हणजे नेमके कांय?) त्यांना सोडून दिले जाते.

न्यायालयासमोर न्यायाच्या प्रतिक्षेत उभे असतांना आरोपीला हा विश्वास पाहिजे की माझ्या देशाच्या न्यायव्यवस्थेत हजार गुन्हेगार सुटलेले चालतील, पण मी निर्दोष असेल तर मला शिक्षा होता कामा नयेअगदी कबूल. पण बलात्काराच्या बाबतीत फक्त पुरुष आरोपी असतात आणी फक्त स्त्रिया फिर्यादी. म्हणजे पन्नास टक्के जनसंख्या एकीकडे आणि पन्नास टक्के दुसरीकडे. मग स्त्रियांना न्यायव्यस्थेबद्दल असा विश्वास वाटेल का की माझ्यावर अत्याचार करणाऱ्याला मोकळे सोडले जाणार नाही. हा विश्वास स्त्रीच्या मनात राहील यासाठी कांय व्यवस्था करणार आहे याचा विचार आज सुप्रीम कोर्टाने करायला हवा आहे.

१९९६ मधे दिलेल्या एका मुलाखतील राम जेठमलानी म्हणाले होते की आपली न्यायव्यवस्था सुधारुन बलात्काराच्या केसेस मधे लौकर सुनावणी होईल अशी व्यवस्था करणे शक्य आहे. आता कदाचित ते म्हणतील की मला एकट्याला कायदा-मंत्री असूनही हे करण शक्य नाही.
Sec. 327 Cr Pc प्रमाणे अशा केसेसची सुनवाई in camera होणे गरजेचे आहे. Panile penetration is rec. for Rape not introducing other bodies.
Rape- १९९४- १२३५१ , १९९५- १३७५४,
१९९६- १४८४२ , १९९०-१००६८

विनयभंग १९९६ is ३०,०००

Age wise- १९९६
< १० वर्ष- ६०८
१०-१६ - ३४७५ १४८४९
१६-३० - ८२८१
>३०- २४६५

NCRB- १९९६
Rape cases pending invest- १९९६३
Cases investigate- ७२.%
’’ changesheeted- ६३.% ----- Police
Pending investigation- ५४६३ २७.%

Rape case pending trial- ५१७३४
Case tried १६.%

Case convicted .%----- court

Pending trial ४३०१६ ८३.%

मप्र, उप्र, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली- have largest no. of cases.

Reg. DNA. Testing.
याला डी.एन्.ए फिंगर प्रिंट असेच म्हणतात. DNA- De-oxy-ribo-Nucleic Acid cell- Chrosmosomes. On the Chromo’s is stretched the DNA structure- double Relical spiral- from end to end.
Humans have 46 chromo’s per cell 23 from mother & 23 from father. They have some basic connecting units called A (Ademine), G (Guanine), T (Thymine) and C (Cytosine)
Onlly A+T can connect}
Or C+G }-------- Complementary Sequences
But not A+C or T+G
Every gene (=Chromosome?) has a typical pattern of complimentary sequences which make a genotypical or a phenotypical (=?) trait, as inherited from the parents.
There are about 1,00,000 genes per cell of our body. (Then gene # chromosome). Some of these genes are unique to that person and can establish his identity beyond doubt. Otherwise most DNA molecules are identical (?).
In the DNA fingerprinting, a genetic- population appropriate- probe of a person’s DNA- sequence takes place the probe (a restriction enzyme) flauks such unique sequences, thus highlighting bands belonging solely to the individual, from whom the DNA sample was extracted.
A tooth, Saliva, fingernail, blood, semen, hair, stained garment and/or bodily tissue samples provide ample material from which to extract one’s DNA.
Two methods of detection:- Single- locus- test and multi-locus-test (this locates several locations of the single-test pattern) and designed to generate many bands so as to best verify the exact match. Possible verification is about 99.99%. The uncertainty comes from-
  1. 1 in 1010 chances that two human’s genes will match.
  2. Identical twins have greater probability of identical genes. The above two are theortical possibilities of a mistake. But there could be a man-made mistake.
Eg. (a) Poor quality of DNA Sample.
(b) Mangled bodies where many tissues are mixed up in the sample.
(c) Multiple or gang-rape may not give correct picture due to mixing up of seven tissues.

Admissibility of Evidence:-
Sec.45 of Ind. Evidence Act- When the court has to form opinion upon some point of a foreing law or of Science or Art, the opinion of experts skilled in that law/ Science/ art is relevant fact.
However the court is not bound to accept the evidence of experts without satisfying itself of reasons of the opinion. The Expert’s testimony is only relevant & not conclusive. (Q- whether the position will change if it is given the status of prime facie evidence?)

American Law:- (Para 823 of their law- book) preliminary proof must first be given that (i) person who makes the test should be competent to do so. (ii) the apparatus is of the kind & condition, suitable for the test (iii) the experiment should be replicable- i.e. some kind of standardisation.

सध्या देशांतDNA testing करु शकेल अशी फक्त एक लॅब आहे- NCMB (National centre for molecular biology) in hyderabad. पण थोड्यांच काळात किमान ८ ठिकाणी अशी lab. होऊ शकेल- दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कलकत्ता, लखनऊ, बंगलोर, अहमदाबाद, पणे. शिवाय एका national centre for DNA fingerprinting & disease diagnostics ची आखणी चालू आहे.
मात्र भारतीय कोर्टांमधे DNA test सर्व मान्यता मिळण्यासाठी या बाबत अतिशय कडक discipline पाळण्याची गरज पडेल. कारण पोलिस कशा प्रकारे सॅम्पल गोळा करतात आणि डॉक्टर्स किती निष्पक्षपातीपणे या tests carry out करतात ते महत्वाचे आहे. कारण आपल्याकडे मेंदूच गायब करणारे डॉक्टर्स उदंड होऊ घातले आहेत. मुळात समर्थाला वाचवण्याचे प्रयत्न implementing machinery करीत राहील तोपर्यंत हा प्रश्न कसा सुटणार

How will we ensure that only objective & unbiased scientists are allowed to carry out such tests? There is need for ample review (=?) & absolute standardization. Then only can we use this potential and astonishingly accurate method of identification. So also the police & judges need to be informed about the validity &  reliability of DNA fingertips.

नॅशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो १९९६ च्या रिपोर्ट प्रमाणे १९९० मधे बलात्काराचे १००६८ तर १९९६ मधे १४८४९ गुन्हे नोंदवले गेले. १९९६ मधे पोलिसांकडे तपासासाठी २०००० (सुमारे) गुन्हे पडून होते त्यापैकी सुमारे १२००० खटले भरले तर सुमारे २००० गुन्ह्यांमधे त्यांना बलात्काराचा गुन्हा वाटला नाही. १९९६ मधे कोर्टापुढे
सुमारे ५०००० बलात्काराच्या केसेस पडून होत्या पैकी सुमारे ८००० सुनावणीसाठी आल्या आणी फक्त चार टक्के केसेस मधे गुन्हा शाबित झाला. अशा परिस्थितीत बलात्कारी माणसाला निव्वळ फांशीची घोषणा झाल्याने परिस्थिती कांय सुधारणार?

बलात्काराच्या गुन्ह्याची शैलीच अशी कांही खास आहे की या गुन्ह्याचा विचार करतांना न्यायालयापुढे सगळे समान हा दृष्टिकोण ठेवणे चुकीचे ठरेल. बलात्काराचा गुन्हा कोणीही एक व्यक्ती कोणत्याही दुस-या व्यक्तिविरुद्ध करत नसून एक (किंवा अनेक) पुरुष दुस-या एकास्त्रि विरुद्ध करत असतात. यात अत्याचार करणारा नेहमीच पुरुष असतो व शिकार होणारी नेहमी स्त्रीच असते. दुसरे असे की बलात्कारामुळे अब्रू लुटली जाणे हे स्त्रीची संपत्ती किंवा आयुष्य लुटण्यापेक्षाही भयंकर असत कारण त्या स्त्रीच्या स्त्री असण्यावरच हा हल्ला असतो. आणी या हृदयाची वेदना तिला आयुष्यभर ठसठसत रहाणार असतात. तिसरी बाब म्हणजे त्या स्त्रीला पुढे समाजात नेहमी शरमिंदे होऊनच वावरावे लागणार असते. एखाद्या माणसाची एक निर्दय क्रिया तिला कितीतरी प्रकाराने छळणार असते. याचा विचार करून IPC मधे बलात्कार आणी स्त्रीत्वाच्या विरुद्ध होणा-या इतर सर्वच अत्याचारांबाबत वेगळे प्रकरण लिहून त्यांचा परामर्श घेतला पाहिजे. त्या अत्याचारामुळे एखाद्या संवेदनक्षय स्त्रीचे किती शारीरिक, मानसिक व सामाजिक खच्ची करुण होऊ शकते, त्या सर्व मुद्यांचा विचार करून तेवढी. जबर शिक्षा गुन्हेगाराला होईल अशी तजबीज केली पाहिजे. त्या ऐवजी प्रत्यक्ष चित्र कांय दिसत? आणि कायदाच कसा चोराला सोडून सन्याश्याला फांशी द्यायला टपलेला आहे याचे एक अजब उदाहरण इथे बघायला मिळते. न्यायालयांत बलात्काराचा किंवा विनयभंगाचा कायदा उभा राहिल्यानंतर आरोपीचे (पुरुषांचे) पूर्व चरित्र कसे होते ते तपासायची परवानगी नसते. तो मुद्दा अप्रासंगिक व अप्रस्तुत- इर्रिलेव्हंट ठरवला जातो. मात्र सुमारेसव्वाशे वर्षापूर्वी लिहिलेल्या इंडियन एव्हिडन्स Act –1872 च्या कलम १५५() अन्वये फिर्यादीचे (नेमकी स्त्री) पूर्वचरित्र, तिचे शुचिर्भूत व पवित्र असणे/नसणे इत्यादिदींचे धिंडवडे काढा येतात. त्यामुळे अत्याचारित्र स्त्रीवरच कोर्टात गुन्हेगारासारखे आरोप होऊन जाते.
IEA 1872 चे कलम १५५() किती चीड आणणारे आहे पहा. कलम १५५ ची सुरुवात कोर्टापुढील साक्षीदाराच्या विश्वासपात्र असण्याबद्दल खालील प्रमाणे शंका उपस्थित करता येते-
() इतर साक्षीदारांनी शपथेवार
सांगितले की ते सदर साक्षीदाराला ओळख असून, त्यांच्या मते तो विश्वासपात्र नाही.
() त्या साक्षीदाराने लाच घेतली आहे असे सिद्ध करून.
() त्याच्याच साक्षीतील इतर वर्णन त्याचा दुस-या वर्णणाशी विसंगत आहे, असे दाखवून.
वरील तीनही प्रकार अत्यंत सालस, व साक्षीदाराला फारसा मनस्तापन देणारे असतात. १५५() मधील सोय मात्र संपूर्णपणे एकतर्फी व बलात्काराच्या गुन्ह्यातून पुरुषाला सोडवण्यासाठीच जणू केली असावी असे वाटते. १५५() सांगते- बलात्कार झाल्याची साक्ष देणारी स्त्री सर्वसाधारण पणे वाईट चालीची होती असे दाखवून तिच्या साक्षीबद्दल शंका घेता येते आणी तिची साक्ष अग्राह्य ठरवली जाऊ शकते.
आज सव्वाशे वर्षांनंतर ही बलात्कार झालेल्या स्त्रीला कोर्टासमोर येतांना न्यायाची शाश्वती तर नाहीच उलट पूर्वचरित्राचे धिंदवडे निघण्याची व त्यांतून व्यवस्थित निष्कर्ष काढले आऊ शकतात. मात्र गॅरंटी आहे . स्त्रियांना न्याय मिळावा अशी आच कायदे करणा-यांना खरोखर आहे कां अशी इथे शंका येते.
कुण्या काळी बलात्काराचा गुन्हा तपासतांना वैद्यकीय पुरावे फारसे पाहिले जात नसत. सन् १९७० नंतर मुख्यतः अमेरिकेत स्त्री अत्याचारां विरुद्धची चळवळ जोरात वाढली, स्त्रियांच्या व पुरुषांच्या वैद्यकीय तपासणीचा आग्रह धरला गेला, आणि या वैद्यकीय तपासण्यांमधे कांही शिस्त व कांही स्टॅण्डर्डायझेशन निर्माण होऊन आता हे पुरावे मोठ्या प्रमाणावर वापरता येतात. निदान आताच्या परिस्थितीत १५५() हे कलम ठेवण्याचे कांही कारण दिसून येत नाही.
याच ठिकाणी कलम १४६ व १५१ देखील मह्वाचे आहे. १४६ अन्वये साक्षीदाराला तीन प्रकारचे प्रश्न विचारता येतात- () त्याची विश्वासार्हता आहे की नाही हे दर्शवणारे प्रश्न () त्याचे पूर्वायुष्य कसे होते त्याबाबतचे प्रश्न व () त्याच्यावर चिखलफेक करून त्याचाच विश्वास ढासळवतील असेप्रश्न. मात्र १५१ कलमान्वये असभ्य (indecent) किंवा स्कॅन्डल्स प्रश्न असल्यास तो थांबवण्याचा कोर्टाला अधिकार आहे. हाही अधिकार बलात्काराच्या केसेस मधे कितीदा वापरला गेला?
मुख्य म्हणजे स्वतःवर बलात्कार
झाल्याची साक्ष देणारी स्त्री ही इतर सर्वसाधारण साक्षीदारांच्या इतकीच तुच्छतेने वागवायची वस्तू आहे कां? तिला होणा-या वेदनांची इतर कुठल्याही प्रकाराला येऊ शकत नाही. स्त्रीत्वावर एकदा घाव घालून पुनः तिने तक्रार केली म्हणून वारंवार घाव घालून पुनः तिने तक्रार केली म्हणून वारंवार घाव घालण्याचे अधिकार कोर्टाला किंवा वकीलांना आपण का दिले आहेत?
१९८९ मधे प्रेमचंद वि. हरयाणा राज्य या केसच्या निकालात सुप्रीम कोर्टाने प्रेमचंदला बलात्काराच्या आरोपातू मुक्त करतांना त्याने तीनदा बलात्कार केलेली स्त्री संशयास्पद चरित्राची, वासनमयी स्त्री असल्याने ( A woman of easy virtues with lewd and lascivious behaviour) तिचा पुरावा अग्राह्य ठरवला होता. मात्र १९९१ मधे महाराष्ट्र राज्य वि. मर्ळीकर या केसमधे सुप्रीम कोर्टाने म्हटले आहे की वाईट चालीची असेल तरी त्या स्त्रीवर बलात्काराचा अधिकार पुरुषाला पोचत नाही, तसेच निव्वळ ती पूर्वायुष्यांत वाईट असेल म्हणून तिची साक्ष खोटी किंवा अग्राह्य ठरत नाही.
तर मग तिची साक्ष अग्राह्य ठरवता यावी यासाठी तिचे पूर्वायुष्य
बदनाम करू बघणारे कलम १५५() ताबडतोब काढून टाकले पाहिजे. ते आपण कधी करणार?
सदरहू कलम रद्द करावे अशी मागणी- New ने केली आहे/ नाही? बलात्कारापेक्षाही जघन्य अपराध म्हणजे सामूहिक बलात्कार. इथेही आपला कायदा स्त्री विरोधी आहे. Gang lacoity vs. gang rape.

IPC 1860
भादंसं मधे स्त्रीत्वाची अप्रतिष्ठा करणा-या गुन्हेगारांसाठी वेगळे प्रकरण केले पाहिजे. त्यामधे खालील प्रमाणे गुन्हे येऊ शकतात
) बलात्कार
) बलात्काराचा प्रयत्न करणे.
) विवस्त्र करुन धिंड काढणे किंवा इतरांसमोर आणणे.
) विवस्त्र करून इतर शारीरिक व मानसिक छळ करणे.
) स्त्रीत्वाची अब्रू लुटण्याची धमकी देणे.
) विनयभंगाचे इतर प्रकार.
) वरील प्रकार सामूहिक रीत्या करणे.
) वरील प्रकार लहान मुलींवर करणे.

या सर्व प्रकारांमधे स्त्रीचा म्हणून मानाने जगण्याचा हक्क
हिरावून घेतला जातो व स्त्रीत्वाची अप्रतिष्ठा होते. त्यामुळे संविधानात सांगितलेला right to live with dignity हा हक्क ती स्त्री बजावू शकत नाही. म्हणूनच वरील सर्व प्रकारच्या गुन्ह्यांना कडक शिक्षा झाली पाहिजे. यामधे लहान मुलींवर बलात्कार करणा-या व्यक्तीला तसेच सामूहिक बलात्काराला निश्चितच फांशीची शिक्षा देण्याची तरतूद योग्य ठरेल.
376 A, B, C, D- ?

302 Murder- (i) Intention, (ii) grievious hurt leading to murder, (iii) Knowl. That g.l will probably lead to murder.

  1. Punishment death, lifer.
304B- Punishment for Dowry death by burning- only 7 years.

307- Attempt to murder. 10 years & in case the attempt results in hurt, then lifer.

325- Punishment or voluntarily causing grievious hurt- upto 7 years.

320- Grievious hurt-
  1. Emascutation, (ii) eye, (iii) ear, (iv) any limb or joint, (v) permanent impairing of powers of any limb/joint, (vi) disfiguiring hand or face, (vii) fracture of bone or tooth (viii) bodily pair for minim 20 days.

354- Assault for outraging modesty- Assault for outraging modesty- 2 years & five (same as 355 for dishonouring a person eg.to slap him.) Same as 356- criminal assault for theft.

390- Robbery- theft/extortions are robbery when a fear of instant death or hurt or restraint is installed.

391- Dacoity- 5 or more doing robbery.

397- attempt to g.l. during robbery of dacoity- not less then 7 years.

398- Attempt to r/d with deadly weapon- not less than 7 years.

399- Preparing for dacoity- RI for 10 years.

402- Assembling for dacoity- upto 7 years.

506- Punishment for criminal intimidation to ensure death / hurt / etc/ to impute inelasticity to a woman upto 7 years.

375- SI under following circumstances-
  1. against will
  2. without consent if above 16 years.
  3. With consent but obtained by putting a fear of death/hurt to her or in other person whom she wants to protect.
  4. With consent but by including her to believe that the man was her husband.
  5. With consent but when she is of unsound mind/drooled etc.

511- Attempt to commit rape crime, punishable only with half the punishment.

228A- Reg. In camera trial, Crpc. 327. IEA १८७२ या कायद्यांत बलात्काराच्या कांही सुधारणा झाल्या आहेत. ११४ए हे नवे कलम १९८३ मधे टाकले आहे.  त्यामुळे शरीर संबंधाला स्त्रीची मान्यता नव्हती असे तिने म्हटल्यास संमति होती हे सिद्ध करण्याची जबाबदारी आरोपीवर टाकण्यांत आली आहे.

Sec. 100 (iii) IPC- बलात्कार टाळण्यासाठी स्त्रीने हत्या केली तर हा self defence धरला जाईल. 354 IPC- Indecent assault with an intention to outrage modesty is a lemious crime (no- not lemious enough- the punishment is only 2 years. 
पुढील पुष्कळ पाने डीटीपी राहिलेली आहेत. ती सोनी पेनड्राइव्हमधे पान ६० ते ६३ आहेत. दि. ०६-०८-२०२०